मेरठ-सहारनपुर MLC चुनाव में भाजपा का दबदबा, शिक्षक संगठनों को फिर झटका; 2027 से पहले बदले सियासी समीकरण

Meerut Saharanpur Division Graduate

मेरठ/सहारनपुर : उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले मेरठ-सहारनपुर खंड शिक्षक और स्नातक एमएलसी चुनाव के नतीजों ने पश्चिमी यूपी की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने दोनों सीटों पर लगातार दूसरी बार जीत दर्ज कर अपना दबदबा कायम रखा है। वहीं, पारंपरिक शिक्षक संगठनों को एक बार फिर हार का सामना करना पड़ा। समाजवादी पार्टी (सपा) ने दूसरे स्थान पर पहुंचने को अपनी राजनीतिक मजबूती के रूप में पेश किया है।

इन चुनावों को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों की ताकत परखने के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, एमएलसी चुनाव के परिणाम विधानसभा चुनावों की तस्वीर तय नहीं करते, लेकिन इनसे क्षेत्र में बदलते राजनीतिक समीकरणों का संकेत जरूर मिलता है।

ओमप्रकाश शर्मा के वर्चस्व को भाजपा ने दी थी चुनौती

मेरठ-सहारनपुर खंड की शिक्षक और स्नातक सीटों पर लंबे समय तक पारंपरिक शिक्षक संगठनों का दबदबा रहा। माध्यमिक शिक्षक संघ के शर्मा गुट के संस्थापक दिवंगत ओमप्रकाश शर्मा ने शिक्षक सीट पर करीब पांच दशक तक प्रतिनिधित्व किया था। उन्होंने लगातार आठ बार जीत दर्ज कर इतिहास बनाया था।

इसी तरह स्नातक सीट पर शर्मा गुट के हेम सिंह पुंडीर चार बार विजयी रहे, जबकि बलबीर सिंह दबथुआ भी इस सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। वर्ष 2020 के चुनाव में भाजपा ने इस वर्चस्व को तोड़ दिया था। भाजपा के श्रीचंद शर्मा ने ओमप्रकाश शर्मा और दिनेश गोयल ने हेम सिंह पुंडीर को हराया था। वर्ष 2026 के चुनाव में भी भाजपा ने दोनों सीटों पर जीत दर्ज कर अपना प्रभाव बरकरार रखा।

शिक्षक संगठनों की एकजुटता में आई कमी

इस चुनाव में शिक्षक संगठनों के बीच आपसी मतभेद भी चर्चा का विषय रहे। माध्यमिक शिक्षक संघ के शर्मा गुट और ठकुराई गुट के पदाधिकारी लगातार मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाते रहे।

हार की आशंका के बीच दोनों गुटों के बीच चुनावी गठबंधन की कोशिश भी हुई, लेकिन अंतिम समय में शर्मा गुट के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष डॉ. प्रमोद मिश्रा के भाजपा में शामिल होने से इन प्रयासों को झटका लगा। इसके बाद दोनों गुट अलग-अलग चुनाव मैदान में उतरे। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, संगठनों के बीच बिखराव और भाजपा की लगातार जीत ने शिक्षक राजनीति के पुराने समीकरणों को कमजोर किया है।

सपा ने दूसरे स्थान को बताया बड़ी उपलब्धि

समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष कर्मवीर सिंह गुमी ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने शिक्षक और स्नातक दोनों सीटों पर पार्टी समर्थकों के वोट बनवाने में जानबूझकर बाधाएं पैदा कीं। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद कार्यकर्ताओं की मेहनत से पार्टी दूसरे स्थान पर पहुंची है। गुमी के मुताबिक, पिछले चुनाव में पार्टी को करीब एक से डेढ़ हजार वोट मिले थे। उन्होंने उम्मीद जताई कि पार्टी का संघर्ष आने वाले समय में रंग लाएगा।

ठकुराई गुट ने लगाए गंभीर आरोप

माध्यमिक शिक्षक संघ के ठकुराई गुट के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. उमेश चंद त्यागी ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूची तैयार करने से लेकर मतदान तक कई अनियमितताएं हुईं। त्यागी के अनुसार, इस संबंध में मंडलायुक्त, उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी और केंद्रीय चुनाव आयोग को शिकायतें भेजी गईं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने गैर-शिक्षकों से मतदान कराए जाने का आरोप भी लगाया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

2027 के चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक हलचल

दोनों एमएलसी सीटों पर जीत से भाजपा कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ा है। वहीं, शिक्षक संगठनों के सामने अपनी खोई राजनीतिक जमीन वापस पाने की चुनौती है। सपा दूसरे स्थान पर पहुंचने को अपनी मजबूती मान रही है।

अब देखना होगा कि एमएलसी चुनाव के ये नतीजे वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में कितना असर डालते हैं। फिलहाल, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा की रणनीति, सपा की तैयारी और शिक्षक संगठनों के भविष्य को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है।

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