विधायक कीरत सिंह को क्लीन चिट मिली तो महिला नेता ने चौथी मंजिल से कूदने की कोशिश की, समिति ने बचाई जान

When MLA Kirat Singh got a clean chit the woman leader tried to jump from the fourth floor

सहारनपुर : गंगोह से भाजपा विधायक कीरत सिंह को शनिवार को बड़ी राहत मिली। गुर्जर जांच समिति ने उन्हें 13 साल की बच्ची के यौन शोषण के आरोप से क्लीन चिट दे दी। यह फैसला समिति के पदाधिकारियों ने शनिवार को सहारनपुर में हुई पंचायत में लिया। फैसला आते ही वहां मौजूद पूर्व भाजपा नेता कोमल चौधरी भड़क गईं। विधायक पर सेटिंग का आरोप लगाते हुए वह सीढ़ियों की ओर दौड़ीं और चौथी मंजिल की बालकनी से नीचे कूदने की कोशिश की। लोगों ने उन्हें पकड़कर वापस खींच लिया। यह बैठक तीसरी मंजिल पर चल रही थी। किसी तरह उन्हें समझा-बुझाकर इमारत से नीचे उतारा गया। लेकिन, नीचे आते ही वह फूट-फूट कर रोने लगीं। रोते-रोते वह थोड़ी देर बाद बेहोश हो गईं। लोगों ने उन्हें संभाला और उनका इलाज करवाया।

When MLA Kirat Singh got a clean chit the woman leader tried to jump from the fourth floor

बता दें कि 20 जून को पूर्व भाजपा नेता कोमल चौधरी ने गंगोह विधायक कीरत सिंह पर उनके परिवार को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा- उनके इशारे पर मुझ पर हमला किया गया। कई फर्जी मुकदमे दर्ज किए गए। भाजपा विधायक ने 13 साल की बच्ची का शारीरिक शोषण किया है। जांच समिति में अध्यक्ष डॉ. चंद्रशेखर और सदस्य जनार्दन चौहान, डॉ. सुनील पवार, वीरेंद्र सिंह, विजेंद्र सिंह और अजय खटाना शामिल हैं। इसमें भाजपा विधायक कीरत सिंह और कोमल चौधरी भी शामिल थे। दोनों पक्षों को सुनने के बाद जांच समिति ने तीन मुख्य बिंदुओं पर अपना फैसला सुनाया। इनमें पारिवारिक कलह और राजनीतिक विवाद, अनैतिकता के आरोप और मोनू पंडित के आपत्तिजनक शब्द शामिल हैं।

समिति ने स्पष्ट किया कि विधायक किसका राजनीतिक समर्थन करते हैं, यह उनका निजी फैसला है। इसमें कोई राजनीतिक साजिश नहीं पाई गई। यह मामला पूरी तरह से पारिवारिक और राजनीतिक मतभेद से जुड़ा है। समिति ने कहा कि कोमल चौधरी द्वारा विधायक कीरत सिंह पर लगाए गए अनैतिकता के आरोप निराधार हैं। कोमल समिति के समक्ष कोई वीडियो या साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकीं। इसलिए उन्हें क्लीन चिट दी जाती है। साथ ही, समिति ने मोनू पंडित द्वारा समाज और कोमल चौधरी के खिलाफ की गई टिप्पणियों को निंदनीय बताया।

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मोनू पंडित को गुर्जर भवन बुलाकर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने को कहा गया। उधर, विधायक को क्लीन चिट मिलते ही कोमल छत की ओर भागी और बालकनी से कूदने की कोशिश की। लोगों ने दौड़कर उसे पकड़ लिया। कोमल चौधरी का कहना है कि किसी ने उसकी बात ध्यान से नहीं सुनी। समिति विधायक को बचाने का मन बना चुकी थी। कुछ लोगों ने समिति के फैसले को एकतरफा बताया। इसके अलावा, कुछ लोगों ने कहा कि अगर कोमल चौधरी के पास सबूत नहीं हैं, तो समिति का फैसला सही है।

पूर्व भाजपा नेता कोमल चौधरी ने 20 जून को सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया था। जिसमें बताया गया था कि गंगोह विधायक कीरत सिंह के इशारे पर मेरे परिवार को परेशान किया जा रहा है। मेरे पैर पर हमला किया गया। मेरे खिलाफ कई फर्जी मुकदमे दर्ज किए गए। कीरत सिंह के अपनी करीबी सहयोगी के साथ समलैंगिक संबंध हैं। इसके अलावा, विधायक ने एक 13 साल की नाबालिग लड़की का शारीरिक शोषण किया है। विधायक मुझे, मेरे पति और परिवार के सदस्यों को लगातार मानसिक रूप से परेशान कर रहे हैं। मैं जल्द ही ठोस सबूत सार्वजनिक करूंगी।

27 जून को कोमल चौधरी ने महापंचायत बुलाई थी। इसमें विधायक और महिला दोनों के समर्थकों के बीच कहासुनी हो गई थी। इसके बाद जमकर हंगामा हुआ था। पुलिस ने दोनों पक्षों को काबू करने के लिए लाठियां भांजी थीं। विधायक के खिलाफ महापंचायत बुलाने पर कोमल चौधरी को भाजपा से निष्कासित कर दिया गया था। तब कीरत सिंह ने कहा था कि कोमल किसी के उकसावे पर मनगढ़ंत आरोप लगा रही हैं। मैं किसी का मुंह बंद नहीं कर सकता। मैं बस इतना कहना चाहूंगा कि वह मेरे खिलाफ जो भी आरोप लगा रही हैं, अगर उसका कोई ऑडियो, वीडियो या सबूत है तो सामने लाएं। वहीं, रामपुर मनिहारान क्षेत्र के गांव उमाही कलां निवासी सुधीर कुमार ने कोमल चौधरी के खिलाफ थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें कहा गया था कि कोमल ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर गंगोह विधायक की छवि को नुकसान पहुंचाया है।

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