सहारनपुर : कलेक्ट्रेट मस्जिद के ध्वस्तिकरण के बाद शरारती तत्वों द्वारा शहर का माहौल ख़राब करने की नाकाम कोशिश की गई है। मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी के बीच सहारनपुर में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की तस्वीरों वाले पोस्टर लगाए जाने का मामला सामने आया है। हिंसा से पोस्टर लगने की सुचना से पुलिस और प्रशासन में हड़कंप मच गया। पोस्टरों में 7 सितंबर 2013 को हुए मुजफ्फरनगर दंगों से जुड़ी तस्वीरों के साथ अखिलेश यादव की तस्वीर भी लगाई गई थी। पोस्टर सामने आने के बाद इलाके में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। आनन-फानन में मौके पर पहुंची पुलिस ने सभी पोस्टरों को हटवा दिया।

आपको बता दें कि पोस्टरों में मुजफ्फरनगर दंगों से जुड़ी कई तस्वीरें लगाई गई थीं। इनमें अखिलेश यादव की तस्वीर भी शामिल थी। पोस्टर पर “न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे…” जैसे संदेश लिखे गए थे। दंगों की बरसी के दिन इस तरह के पोस्टर सामने आने के बाद इसे राजनीतिक संदेश से जोड़कर देखा जा रहा है। पोस्टर किस व्यक्ति या संगठन की ओर से लगाए गए थे, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है। फिलहाल पुलिस ने पोस्टरों को हटवा दिया है और मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाई जा रही है। प्रशासन की ओर से भी पूरे घटनाक्रम पर नजर रखी जा रही है।
गौरतलब है कि सितंबर 2013 में मुजफ्फरनगर और आसपास के पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में सांप्रदायिक हिंसा हुई थी। 7 सितंबर 2013 को शुरू हुई हिंसा के बाद कई दिनों तक तनाव की स्थिति बनी रही थी। बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए थे और यह घटना पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक प्रमुख मुद्दा बनी रही। इस बार भी दंगों की बरसी के दौरान पोस्टर लगाए जाने से राजनीतिक माहौल गरमाने की आशंका जताई जा रही है। खास बात यह है कि सहारनपुर में हाल के दिनों में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के ध्वस्तीकरण को लेकर पहले से ही सियासी गतिविधियां तेज हैं। ऐसे में दंगों से जुड़ी तस्वीरों वाले पोस्टर सामने आने के बाद पुलिस-प्रशासन अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है।

