बिस्तर पर मिला था अमित का शव, पास में था सांप
मामला मेरठ जिले के बहसूमा थाना क्षेत्र के अकबरपुर सादात गांव का है। 13 अप्रैल 2025 की सुबह अमित कश्यप का शव उसके बिस्तर पर मिला था। बिस्तर पर एक सांप भी मौजूद था। अमित के शरीर पर सांप के काटने जैसे करीब 10 निशान बताए गए थे। परिस्थितियों को देखकर परिवार के लोगों ने शुरुआत में माना कि उसकी मौत सांप के डसने से हुई है।
हालांकि, जब शव का पोस्टमार्टम कराने की बात आई तो पत्नी रविता ने इसका विरोध किया। उसके इस व्यवहार के बाद परिवार के लोगों को संदेह हुआ। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया कि अमित के शरीर में सांप का जहर नहीं था। उसकी मौत दम घुटने से हुई थी। रिपोर्ट में गर्दन की हायॉइड हड्डी और थायरॉइड कार्टिलेज टूटने की बात भी सामने आई, जिससे पुलिस का शक गहराने लगा।
मोबाइल कॉल रिकॉर्ड से खुली साजिश की परतें
पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू की और रविता के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल रिकॉर्ड खंगाली। जांच में पता चला कि वारदात के आसपास के 24 घंटों में रविता और अमित के दोस्त अमरदीप के बीच 51 बार बातचीत हुई थी। इस जानकारी ने पुलिस के संदेह को और मजबूत कर दिया।
पूछताछ के दौरान रविता ने पहले पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन बाद में उसने अमरदीप के साथ संबंध होने की बात स्वीकार की। पुलिस के मुताबिक, अमित को दोनों के रिश्ते पर शक था और इस बात को लेकर विवाद होता था। रविता ने कथित तौर पर आशंका जताई थी कि अमित उनके खिलाफ कार्रवाई कर सकता है। इसी विवाद के चलते पति को रास्ते से हटाने की साजिश रचे जाने की बात जांच में सामने आई।
पूजा के नाम पर खरीदा गया था सांप
जांच में यह भी सामने आया कि हत्या से पहले रविता अपने पति और बच्चों के साथ सहारनपुर स्थित मां शाकुंभरी देवी मंदिर में दर्शन करने गई थी। बताया गया कि परिवार मंदिर से लौटने के बाद वारदात को अंजाम देने की योजना बना रहा था।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर एक सपेरे से पूजा के लिए सांप की जरूरत बताकर एक हजार रुपये में सांप खरीदा था। अमित की हत्या के बाद सांप को उसके शव के पास इस तरह रखा गया कि मौत सांप के काटने से हुई प्रतीत हो। हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जहर नहीं मिलने से यह कहानी टिक नहीं सकी और पुलिस ने हत्या की दिशा में जांच आगे बढ़ाई।
भाई की शिकायत पर दर्ज हुआ था मुकदमा
अमित के भाई मोनू कश्यप ने 16 अप्रैल 2025 को बहसूमा थाने में रविता और अमरदीप के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने जांच के दौरान मेडिकल रिपोर्ट, मोबाइल कॉल रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों को आधार बनाया। इसके बाद दोनों आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 12 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। अमित के भाई मोनू, मुनेश और कृष्ण के अलावा सपेरे प्रीतमनाथ की गवाही महत्वपूर्ण रही। विवेचक पंकज गौतम, सरकारी चिकित्सक डॉ. कपिल गर्ग, विवेचक इंदु वर्मा और मोबाइल कंपनियों के नोडल अधिकारियों के बयान भी अदालत में पेश किए गए।
अदालत ने सुनाई फांसी की सजा
मामले की सुनवाई मेरठ की एडीजे-12 अदालत में हुई। अदालत ने पहले ही रविता और अमरदीप को हत्या तथा साक्ष्य मिटाने का दोषी ठहराया था। शुक्रवार को सजा के बिंदु पर सुनवाई के बाद दोनों को फांसी की सजा सुनाई गई।
जिला शासकीय अधिवक्ता फरजाना मकसूद के मुताबिक, मामले में अभियोजन पक्ष ने सजा के समर्थन में दलीलें रखीं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, कॉल डिटेल और गवाहों के बयान मुकदमे में अहम साबित हुए। अदालत के फैसले के साथ ही उस साजिश का खुलासा न्यायिक निष्कर्ष तक पहुंचा, जिसमें एक हत्या को सांप के काटने से हुई मौत दिखाने की कोशिश की गई थी।

