गिरधारी लाल साहू के खिलाफ शुक्रवार को देहरादून के कैंट थाने में उनकी पत्नी और कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। शिकायत में आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी, जालसाजी, प्रताड़ना और SC/ST एक्ट के तहत आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
अदालत में दोनों पक्षों ने रखीं दलीलें
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि रेखा आर्या और गिरधारी लाल साहू की शादी को करीब 22 साल हो चुके हैं और दोनों के बीच विवाद घरेलू तथा आर्थिक प्रकृति का है। बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने यह भी कहा कि कथित जातिसूचक टिप्पणी निजी बंद कमरे में की गई थी, जहां आम जनता मौजूद नहीं थी।
वहीं, राज्य सरकार की ओर से विशेष लोक अभियोजक गोविंद सिंह ने अग्रिम जमानत याचिका का विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि मंत्री के सरकारी आवास पर कर्मचारियों की मौजूदगी में कथित तौर पर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया था।
अदालत ने टिप्पणी की कि निजी परिसर में भी यदि अन्य लोगों की मौजूदगी में किसी का अपमान किया जाता है, तो वह स्थान ‘पब्लिक व्यू’ के दायरे में आ सकता है। अदालत ने कहा कि कर्मचारियों की मौजूदगी और घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी। SC/ST एक्ट के तहत अग्रिम जमानत पर लागू कानूनी प्रतिबंधों को ध्यान में रखते हुए याचिका खारिज कर दी गई।
रेखा आर्या ने लगाए गंभीर आरोप
रेखा आर्या ने अपने पति पर मारपीट, उत्पीड़न, दूसरी शादी छिपाने और जान से मारने की कथित साजिश रचने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कथित बातचीत से जुड़ा एक ऑडियो भी सोशल मीडिया पर साझा किया था। उनकी शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
दूसरी ओर, गिरधारी लाल साहू ने इन आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने कथित ऑडियो को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार किया गया बताया और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की। उन्होंने रेखा आर्या पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए उनकी संपत्ति की जांच की मांग भी की है।
SIT भी कर रही मामले की जांच
इस विवाद की जांच के लिए गठित विशेष जांच टीम (SIT) रेखा आर्या के बयान दर्ज कर चुकी है और संबंधित दस्तावेज जुटाए गए हैं। अब गिरधारी लाल साहू की अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई पर निगाहें टिकी हैं। हालांकि, लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

