लखनऊ : बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने सोमवार को लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय से चुनाव प्रक्रिया, ईवीएम, बैलेट पेपर और SIR को लेकर बयान जारी किया। उन्होंने ईवीएम से मतदान बंद कर देश में बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग दोहराई। मायावती ने कहा कि प्रत्येक मतदाता को यह भरोसा होना चाहिए कि उसने जिस उम्मीदवार के पक्ष में वोट दिया है, उसका मत उसी के खाते में दर्ज और गिना गया है।
मायावती ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की जिम्मेदारी निर्वाचन आयोग की है। उनके मुताबिक चुनाव प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिसमें मतदाता के मन में अपने वोट को लेकर किसी तरह का संदेह न रहे। उन्होंने कहा कि चुनाव व्यवस्था पर भरोसा कमजोर होने से लोकतांत्रिक प्रक्रिया में लोगों का विश्वास प्रभावित हो सकता है।
EVM के बजाय बैलेट पेपर की मांग
बसपा प्रमुख ने कहा कि देश में शुरुआती कई दशकों तक बैलेट पेपर के जरिए चुनाव कराए जाते रहे। उनके मुताबिक मतपत्रों की गिनती के दौरान राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि मौजूद रहते थे। मायावती ने कहा कि बाद में ईवीएम के जरिए मतदान और मतगणना की व्यवस्था लागू की गई।
उन्होंने अपने बयान में बीजेपी के पुराने EVM विरोध का भी जिक्र किया। मायावती का दावा है कि जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, तब बीजेपी के नेताओं ने भी ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए थे। उन्होंने सवाल किया कि सत्ता में आने के बाद बीजेपी ने ईवीएम व्यवस्था को समाप्त करने के बजाय इसे जारी क्यों रखा। ये मायावती द्वारा उठाए गए राजनीतिक आरोप और सवाल हैं।
मायावती ने कहा कि बसपा शुरू से ही ईवीएम से मतदान का विरोध करती रही है। उन्होंने VVPAT व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सभी VVPAT पर्चियों की गिनती नहीं होने से उनकी पार्टी की आशंकाएं दूर नहीं हुई हैं।
चंद्रशेखर आजाद पर लगाए आरोप
मायावती ने नगीना लोकसभा सीट से सांसद और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि नगीना में पर्याप्त जनाधार नहीं होने के बावजूद बीजेपी ने कथित EVM गड़बड़ी के जरिए उन्हें चुनाव जिताया, ताकि बसपा को नुकसान पहुंचाया जा सके। इस दावे के समर्थन में मायावती ने कोई स्वतंत्र तकनीकी या जांच संबंधी प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया है।
उन्होंने चंद्रशेखर आजाद की कार्यशैली पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि वह दलित युवाओं को धरना-प्रदर्शन के लिए आगे करते हैं और बाद में उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज हो जाते हैं। मायावती ने कहा कि ऐसे मुकदमों के कारण युवाओं को नौकरी और अन्य अवसरों में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ये भी उनके द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं।
चंद्रशेखर आजाद ने प्रतिक्रिया में कहा कि वह मायावती का सम्मान करते हैं, लेकिन नगीना की जनता के जनादेश को किसी साजिश से जोड़ना स्वीकार नहीं है। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और बैलेट पेपर की मांग का समर्थन किया।
SIR को लेकर भी बोलीं मायावती
मायावती ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि SIR को लेकर लोगों के बीच जो भ्रम या आशंकाएं हैं, उन्हें दूर किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता के साथ मतदाताओं का विश्वास बनाए रखना जरूरी है।
बसपा प्रमुख का यह बयान ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले EVM, मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बहस तेज है। मायावती ने अपने बयान में निष्पक्ष चुनाव, मतदाता के भरोसे और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को प्रमुख मुद्दा बनाया।

