सहारनपुर/मोहाली : पंजाब के मोहाली में हुए चर्चित बम ब्लास्ट मामले की जांच अब उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के देवबंद क्षेत्र तक पहुंच गई है। यूपी एटीएस और पंजाब एसटीएफ की संयुक्त टीम ने देवबंद कोतवाली इलाके के गांव बचीटी में छापेमारी कर एक युवक को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों का दावा है कि गिरफ्तार युवक का नाम पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े संदिग्ध नेटवर्क में सामने आया है। पकड़े गए युवक के पास से जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े होने के सबूत भी ATS के हाथ लगे हैं।
यूपी ATS और पंजाब एसटीएफ की संयुक्त कार्यवाई में पकड़ा गया युवक मोहत्सीम गांव बचीटी के मौजूदा ग्राम प्रधान का भाई बताया जा रहा है। जांच एजेंसियों के अनुसार उस पर आरोप है कि उसने अपने व्हाट्सएप अकाउंट से जुड़े ओटीपी और अन्य तकनीकी सुविधाएं पाकिस्तान में बैठे संदिग्ध हैंडलरों को उपलब्ध कराईं हुई है। इन माध्यमों का उपयोग भारत में विभिन्न लोगों को संदेश भेजने और नेटवर्क संचालित करने के लिए किया गया।
कार्रवाई के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने युवक के कब्जे से इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य संदिग्ध सामग्री भी बरामद की है। अधिकारियों के अनुसार बरामद सामान को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा, जिससे नेटवर्क से जुड़े अन्य संभावित संपर्कों और गतिविधियों का पता लगाया जा सके। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि मोहत्सीम पहले भी देवबंद कोतवाली का हिस्ट्रीशीटर रह चुका है और उसके खिलाफ विभिन्न आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। हालांकि इन पुराने मामलों का मोहाली ब्लास्ट जांच से कोई सीधा संबंध है या नहीं, इस बारे में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
गांव बचीटी में हुई इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। सुरक्षा एजेंसियां फिलहाल मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अधिक जानकारी साझा करने से बच रही हैं। माना जा रहा है कि पूछताछ के आधार पर अन्य राज्यों में भी आगे कार्रवाई हो सकती है। गौरतलब है कि सितंबर 2021 में मोहाली इंटेलिजेंस हेडक्वॉटर RPG Attack ने देश की सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया था। इसके बाद विभिन्न राज्यों में फैले संदिग्ध नेटवर्क की जांच शुरू हुई थी। जांच एजेंसियों के अनुसार इस मामले में सीमा पार बैठे तत्वों और उनके भारतीय संपर्कों की भूमिका की भी पड़ताल की जाती रही है। देवबंद से हुई यह गिरफ्तारी उसी जांच की एक महत्वपूर्ण कड़ी मानी जा रही है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए विभिन्न केंद्रीय और राज्य स्तरीय एजेंसियां डिजिटल साक्ष्यों, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), सोशल मीडिया अकाउंट्स और अन्य तकनीकी जानकारियों का विश्लेषण कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां इस मामले से जुड़े हर पहलू की गहन जांच कर रही हैं और संभावित नेटवर्क की पहचान करने में जुटी हुई हैं।
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