सहारनपुर: सहारनपुर नगर निगम एक बार फिर अपने गृहकर नोटिस को लेकर विवादों में घिर गया है। कुछ दिन पहले समाजवादी पार्टी के नेता फरहाद आलम गाड़ा को 22 करोड़ रुपये का गृहकर नोटिस भेजे जाने का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब कमेला कॉलोनी निवासी गुलफाम अहमद के महज 50 वर्ग गज के मकान पर करीब 146 करोड़ 61 लाख रुपये का गृहकर बकाया दर्शाते हुए नोटिस जारी कर दिया गया। इतना ही नहीं, नोटिस में 15 दिन के भीतर राशि जमा करने और भुगतान न होने पर मकान कुर्क करने की चेतावनी भी दी गई है।

नोटिस देखकर परिवार के उड़ गए होश
गुलफाम अहमद के परिवार का कहना है कि उन्हें लगा था कि यह सामान्य कर संबंधी सूचना होगी, लेकिन जब नोटिस खोला गया तो उसमें दर्ज राशि देखकर पूरा परिवार स्तब्ध रह गया। परिवार का कहना है कि इतनी बड़ी रकम किसी बड़े उद्योगपति पर भी शायद ही लगाई जाती हो, जबकि उनका मकान केवल 50 वर्ग गज का है। इस नोटिस के बाद परिवार मानसिक तनाव में है।
सिर्फ तकनीकी गलती या प्रशासनिक लापरवाही?
मामले ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि यह केवल कंप्यूटर की तकनीकी त्रुटि थी, तो बिना सत्यापन के इतना बड़ा नोटिस कैसे जारी हो गया? नोटिस पर संबंधित अधिकारी के हस्ताक्षर भी मौजूद हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या दस्तावेजों की जांच किए बिना ही नोटिस जारी किए जा रहे हैं या फिर पूरी प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही बरती जा रही है।
जीआईएस सर्वे पहले भी रहा है विवादों में
नगर निगम द्वारा कराया गया जीआईएस सर्वे पहले भी विवादों में रहा है। शहर के कई लोगों ने आरोप लगाया था कि सर्वे के आधार पर मकानों और प्रतिष्ठानों का गलत मूल्यांकन कर मनमाना गृहकर लगाया गया। विरोध के बाद स्वकर निर्धारण प्रणाली लागू की गई, लेकिन जिन लोगों ने स्वयं विवरण नहीं भरा, उन्हें अब भी जीआईएस सर्वे के आधार पर भारी-भरकम कर नोटिस भेजे जा रहे हैं। ऐसे में सर्वे की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
नगर आयुक्त ने बताई डेटा ट्रांसफर की वजह
इस मामले में नगर आयुक्त शिपु गिरी ने कैमरे पर कुछ भी कहने से इनकार किया। हालांकि, ऑफ द रिकॉर्ड उन्होंने बताया कि मार्च माह में वेबसाइट पर अधिक लोड होने के कारण हाउस टैक्स का डेटा दूसरे पोर्टल पर स्थानांतरित किया गया था। इसी दौरान डेटा में तकनीकी गड़बड़ी आ गई, जिसे अब ठीक किया जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल अब भी कायम
हालांकि नगर आयुक्त ने डेटा ट्रांसफर को कारण बताया, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि समस्या केवल तकनीकी थी तो 147 करोड़ रुपये जमा करने और मकान कुर्क करने की चेतावनी वाला नोटिस कैसे जारी हो गया? उस पर संबंधित अधिकारी के हस्ताक्षर कैसे हुए और अंतिम स्तर पर किसी ने उसकी जांच क्यों नहीं की? लगातार दूसरी बार करोड़ों रुपये के गलत गृहकर नोटिस सामने आने से नगर निगम की जवाबदेही और कर निर्धारण प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि प्रशासन दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई करता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कौन से ठोस कदम उठाए जाते हैं।

