हरियाणा को इंडस्ट्रियल हब बनाने की तैयारी, 5 लाख करोड़ के निवेश पर नजर; 10 नई IMT से खुलेगा रोजगार का रास्ता

Plans underway to turn Haryana into an industrial hub, with sights set on ₹5 lakh crore in investment; 10 new IMTs to pave the way for employment.

चंडीगढ़ : हरियाणा को देश के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में और मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार ने निवेश बढ़ाने की रणनीति तेज कर दी है। सरकार का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में प्रदेश में पांच लाख करोड़ रुपये का निवेश लाना है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए नई इंडस्ट्रियल मॉडल टाउनशिप (IMT) विकसित करने, औद्योगिक भूमि उपलब्ध कराने, विदेशी कंपनियों से संपर्क बढ़ाने और निवेशकों के लिए प्रक्रियाएं आसान बनाने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार की योजना केवल बड़े उद्योग स्थापित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए रोजगार, छोटे कारोबार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति देने की है।

हरियाणा पहले से ही ऑटोमोबाइल, विनिर्माण, आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में अपनी पहचान रखता है। गुरुग्राम, फरीदाबाद, मानेसर और बावल जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में कंपनियों की मौजूदगी ने प्रदेश को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कारोबारी नेटवर्क से जोड़ा है। अब सरकार इस औद्योगिक आधार का विस्तार नए क्षेत्रों तक करना चाहती है, ताकि निवेश कुछ चुनिंदा शहरों तक सीमित न रहे और प्रदेश के अधिक जिलों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ सकें।

इसी रणनीति के तहत मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और उद्योग मंत्री राव नरबीर सिंह निवेशकों से संपर्क कर रहे हैं। सरकार के मुताबिक, जापान से करीब 3,900 करोड़ रुपये और सिंगापुर से लगभग 5,500 करोड़ रुपये के निवेश से जुड़ी पहल हुई है। स्वीडन से भी निवेश आकर्षित करने के प्रयास किए गए हैं। इसी कड़ी में उद्योग मंत्री राव नरबीर सिंह 19 से 22 अक्टूबर तक दक्षिण कोरिया के दौरे पर हैं। इस यात्रा में दक्षिण कोरियाई कंपनियों के साथ औद्योगिक सहयोग और संभावित निवेश के अवसरों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

10 नई IMT से औद्योगिक विकास को विस्तार देने की योजना

हरियाणा सरकार 10 नई इंडस्ट्रियल मॉडल टाउनशिप विकसित करने की सोच के साथ आगे बढ़ रही है। इन टाउनशिप का उद्देश्य कंपनियों को उद्योग स्थापित करने के लिए बेहतर आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना है। औद्योगिक क्षेत्रों में जमीन, सड़क, बिजली, परिवहन और अन्य जरूरी सुविधाओं की उपलब्धता निवेशकों के निर्णय को प्रभावित करती है। ऐसे में सरकार की कोशिश है कि कंपनियों को परियोजनाएं शुरू करने के लिए तैयार औद्योगिक ढांचा मिले।

सरकार की योजना में आईएमटी खरखौदा के विस्तार के लिए लगभग 5,800 एकड़, आईएमटी कोसली के लिए करीब 5,000 एकड़, आईएमटी बावल के विस्तार के लिए लगभग 2,000 एकड़ और आईएमटी सोहना के विस्तार के लिए करीब 1,500 एकड़ अतिरिक्त भूमि चिह्नित करने की बात कही गई है। इन क्षेत्रों का विकास होने से औद्योगिक गतिविधियों के लिए नए स्थान उपलब्ध हो सकते हैं।

हालांकि, औद्योगिक भूमि चिह्नित करना और उस पर वास्तविक परियोजनाएं स्थापित होना अलग-अलग चरण हैं। निवेश को जमीन पर उतारने के लिए बुनियादी ढांचे का समय पर विकास, मंजूरियों की प्रक्रिया, निवेशकों की जरूरतों और स्थानीय परिस्थितियों के बीच तालमेल जरूरी होगा।

बड़ी कंपनियों की परियोजनाओं से निवेश की उम्मीद

प्रदेश में विभिन्न क्षेत्रों की बड़ी कंपनियां निवेश की योजनाओं से जुड़ी हैं। सरकार की ओर से दिए गए आंकड़ों के अनुसार, मारुति सुजुकी की 800 एकड़ भूमि पर 18,000 करोड़ रुपये की परियोजना, एटीएल की 178 एकड़ में 7,000 करोड़ रुपये की परियोजना और यूनो-मिंडा की 94 एकड़ में 11,000 करोड़ रुपये की परियोजना का उल्लेख किया गया है।

इसके अलावा आदित्य बिरला ग्रुप की 70 एकड़ में 1,140 करोड़ रुपये, टोयोटा बोशोकु की 21 एकड़ में 400 करोड़ रुपये, अमूल की 10 एकड़ में 300 करोड़ रुपये और डेन्सो की 37 एकड़ में 570 करोड़ रुपये की परियोजनाएं भी निवेश परिदृश्य का हिस्सा हैं। लॉजिस्टिक्स और परिवहन से जुड़े क्षेत्र में फ्लिपकार्ट की 140 एकड़ में 1,300 करोड़ रुपये तथा फैवेली ट्रांसपोर्ट की पांच एकड़ में 200 करोड़ रुपये की परियोजना का उल्लेख किया गया है। यूफ्लेक्स की 14 एकड़ में 300 करोड़ रुपये की परियोजना भी सूची में शामिल है।

सरकार के मुताबिक, यामाहा, एस्कोर्ट्स, व्हर्लपूल, इंडियन ऑयल, एशियन पेंट्स, जेसीबी, होंडा, सन फार्मा, पैनासोनिक, हीरो, टाटा, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, सैमसंग और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स सहित कई कंपनियां प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों से जुड़ी हैं।

इन परियोजनाओं के आंकड़ों को निवेश की योजनाओं और संबंधित परियोजनाओं के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। वास्तविक निवेश, निर्माण की स्थिति और उत्पादन शुरू होने का स्तर परियोजना-दर-परियोजना अलग हो सकता है। सरकार के सामने चुनौती यही है कि निवेश की घोषणाएं समयबद्ध तरीके से वास्तविक औद्योगिक उत्पादन में बदलें।

ऑटोमोबाइल से आगे बढ़कर विविध क्षेत्रों पर जोर

हरियाणा की औद्योगिक अर्थव्यवस्था में ऑटोमोबाइल और उसके सहायक उद्योगों की अहम भूमिका रही है। लेकिन भविष्य की जरूरतों को देखते हुए सरकार निवेश का दायरा व्यापक बनाना चाहती है। ऊर्जा भंडारण, इलेक्ट्रॉनिक्स, खाद्य प्रसंस्करण, वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक्स और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में नए अवसर पैदा करने की कोशिश की जा रही है।

इस विविधता से प्रदेश को एक ही उद्योग पर निर्भर रहने के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। उदाहरण के तौर पर, बड़ी विनिर्माण इकाइयों के आसपास मशीनों के पुर्जे बनाने वाली कंपनियों, पैकेजिंग इकाइयों, परिवहन सेवाओं, गोदामों और औद्योगिक रखरखाव से जुड़े व्यवसायों की मांग बढ़ सकती है। इसी तरह खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े उद्योग किसानों, डेयरी कारोबार और आपूर्ति शृंखला के दूसरे हिस्सों को बाजार से जोड़ सकते हैं।

इस तरह बड़े उद्योगों के विस्तार का असर केवल कारखानों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आसपास के बाजारों और सेवाओं में भी आर्थिक गतिविधियां बढ़ा सकता है।

निवेशकों को आकर्षित करने के लिए नई नीति की तैयारी

उद्योग मंत्री राव नरबीर सिंह ने कहा है कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और वह स्वयं निवेश लाने के लिए देश-विदेश में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अगले साल अप्रैल में गुरुग्राम में हैपनिंग हरियाणा समिट आयोजित करने की योजना है। इस मंच के माध्यम से निवेशकों को प्रदेश की औद्योगिक संभावनाओं से अवगत कराने और नए निवेश प्रस्तावों को आगे बढ़ाने की कोशिश की जाएगी।

मंत्री के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने पांच वर्षों में पांच लाख करोड़ रुपये का निवेश लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली के निकट होने और बेहतर कनेक्टिविटी के कारण हरियाणा निवेशकों के लिए आकर्षक स्थान है।

राव नरबीर सिंह ने यह भी स्वीकार किया कि हरियाणा में औद्योगिक जमीन की कीमतें कुछ अन्य राज्यों की तुलना में अधिक हैं। इस चुनौती से निपटने के लिए सरकार उद्योगपतियों को जमीन लीज पर उपलब्ध कराने की नीति लाने पर विचार कर रही है। यदि यह व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो जमीन खरीदने पर होने वाला शुरुआती खर्च कुछ निवेशकों के लिए कम हो सकता है। इससे नए उद्यमियों को भी उद्योग स्थापित करने का अवसर मिल सकता है।

सरकार औद्योगिक क्षेत्रों में सिंगल-विंडो सहायता, प्लग-एंड-प्ले सुविधाओं, तैयार फैक्ट्री शेड, गोदाम, कर्मचारी आवास, अस्पताल, कौशल विकास केंद्र और स्टार्टअप इन्क्यूबेशन सुविधाओं को बढ़ावा देने की बात कह रही है। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य निवेशकों को उद्योग शुरू करने के लिए जरूरी सुविधाएं एक ही औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र में उपलब्ध कराना है।

रोजगार के साथ MSME सेक्टर को मजबूत करने की उम्मीद

निवेश की सफलता का एक प्रमुख पैमाना रोजगार सृजन होगा। नई फैक्ट्रियों को इंजीनियरों, तकनीकी कर्मचारियों, मशीन ऑपरेटरों, गुणवत्ता नियंत्रण विशेषज्ञों, प्रशासनिक कर्मचारियों और अन्य श्रमिकों की जरूरत होगी। इसके अलावा निर्माण, परिवहन, पैकेजिंग, वेयरहाउसिंग और रखरखाव जैसे क्षेत्रों में भी काम के अवसर पैदा हो सकते हैं।

गुरुग्राम के उद्योगपति विनोद का कहना है कि विदेशी निवेश बढ़ने से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों यानी एमएसएमई क्षेत्र को लाभ मिल सकता है। बड़ी कंपनियों के आने से छोटे उद्योगों को आपूर्ति शृंखला में शामिल होने, नए ऑर्डर प्राप्त करने, तकनीक अपनाने और कारोबार का विस्तार करने के अवसर मिल सकते हैं।

छोटी इकाइयां यदि बड़ी कंपनियों की गुणवत्ता और उत्पादन संबंधी जरूरतों को पूरा करने में सक्षम होती हैं, तो उन्हें नियमित कारोबारी अवसर मिल सकते हैं। इससे स्थानीय उद्यमियों के साथ-साथ परिवहन, पैकेजिंग और अन्य सहायक सेवाओं से जुड़े व्यवसायों को भी फायदा पहुंच सकता है।

डीएलएफ इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष श्रीराम अग्रवाल ने भी उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए सरकार के प्रयासों को सकारात्मक बताया। उनका कहना है कि नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित होने और विदेशी निवेशकों से संपर्क बढ़ने से हरियाणा के औद्योगिक नेटवर्क को मजबूती मिल सकती है। उन्होंने छोटे कारोबारियों को उद्योग स्थापित करने में राहत देने के कदमों को भी उपयोगी बताया।

हालांकि, निवेश से स्थानीय कारोबारियों को लाभ तभी व्यापक रूप से मिलेगा, जब छोटे उद्योगों को वित्त, तकनीक, कुशल श्रमिक और बड़े उद्योगों की आपूर्ति शृंखला तक पहुंच उपलब्ध हो। इसलिए एमएसएमई के लिए साझा सुविधा केंद्र, कौशल प्रशिक्षण और कारोबार से जुड़ी सहायता भी अहम होगी।

कांग्रेस ने सरकार के दावों पर उठाए सवाल

प्रदेश में निवेश के मुद्दे पर सियासी बहस भी तेज है। नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा और कांग्रेस के अन्य नेताओं ने भाजपा सरकार के विदेशी दौरों पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार निवेश और विकास को लेकर बड़े दावे कर रही है, लेकिन नए उद्योगों और बुनियादी परियोजनाओं के मामले में अपेक्षित परिणाम दिखाई नहीं दे रहे। विपक्ष ने मुख्यमंत्री के विदेश दौरों को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

दूसरी ओर, सरकार का तर्क है कि वैश्विक निवेशकों से संपर्क बनाए रखना और प्रदेश की औद्योगिक क्षमता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करना जरूरी है। विदेशी कंपनियों से बातचीत निवेश प्रक्रिया का शुरुआती हिस्सा होती है, लेकिन उसके बाद परियोजनाओं की मंजूरी, वित्तीय व्यवस्था, जमीन, निर्माण और उत्पादन जैसे चरण पूरे करने पड़ते हैं।

इसलिए निवेश के दावों का आकलन केवल प्रस्तावित रकम से नहीं, बल्कि वास्तविक निवेश, शुरू हुई परियोजनाओं, उत्पादन क्षमता और रोजगार के आंकड़ों से करना महत्वपूर्ण होगा।

अर्थशास्त्री की राय- निवेश के साथ कौशल और आधारभूत ढांचा जरूरी

आर्थिक मामलों के जानकार बिमल अंजुम के अनुसार, विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए राज्य में अनुकूल कारोबारी माहौल बनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि हरियाणा कृषि आधारित अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर सेवा और औद्योगिक क्षेत्रों में अपनी पहचान बना चुका है। ऐसे में सरकार को निवेश के साथ शिक्षा, कौशल विकास और बुनियादी ढांचे पर भी ध्यान देना होगा।

किसी राज्य में औद्योगिक निवेश तभी दीर्घकालिक लाभ दे सकता है, जब कंपनियों की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित कर्मचारी उपलब्ध हों। उद्योगों की मांग और शिक्षा व्यवस्था के बीच अंतर रहने पर कंपनियों को बाहर से कुशल कर्मचारी लाने पड़ सकते हैं, जबकि स्थानीय युवाओं को अपेक्षित रोजगार नहीं मिल पाता। इसलिए तकनीकी प्रशिक्षण, व्यावसायिक शिक्षा और उद्योगों के साथ प्रशिक्षण कार्यक्रमों का तालमेल महत्वपूर्ण है।

घोषणाओं से आगे बढ़कर जमीन पर परिणाम की चुनौती

हरियाणा के लिए पांच लाख करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य औद्योगिक विस्तार की बड़ी महत्वाकांक्षा को दर्शाता है। नई आईएमटी, विदेशी निवेशकों से बातचीत, जमीन लीज पर देने की संभावित नीति और एमएसएमई को बढ़ावा देने के प्रयास इस दिशा में अहम कदम हो सकते हैं।

लेकिन असली सफलता इस बात से तय होगी कि कितनी परियोजनाएं समय पर शुरू होती हैं, कितना निवेश वास्तव में आता है, कितने स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलता है और छोटे कारोबारियों को कितना फायदा पहुंचता है। यदि औद्योगिक विकास के साथ कौशल, परिवहन, आवास और सार्वजनिक सुविधाओं का विस्तार भी होता है, तो हरियाणा की अर्थव्यवस्था को व्यापक लाभ मिल सकता है। फिलहाल सरकार की रणनीति निवेश आकर्षित करने की है; आने वाले समय में उसके वास्तविक परिणाम ही इस प्रयास की सफलता का आकलन करेंगे।

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