लखनऊ : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में नकली दवाओं के कारोबार का एक बड़ा मामला सामने आया है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने फर्जी बिलिंग और कागजी लेनदेन के जरिए नकली दवाओं को बाजार में खपाने वाले कथित नेटवर्क का खुलासा किया है। मामले में अमीनाबाद थाने में पांच दवा कारोबारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। विभाग की कार्रवाई के बाद दवा कारोबारियों में हड़कंप मचा हुआ है।
ज्वाइंट कमिश्नर ब्रजेश कुमार के मुताबिक, जांच में सामने आया कि कुछ दवा कारोबारियों द्वारा बिना वास्तविक दवाओं की सप्लाई किए आपस में क्रॉस बिलिंग की जा रही थी। आरोप है कि फर्जी बिल तैयार कर कागजों पर करोड़ों रुपये की दवाओं की खरीद-बिक्री दिखाई गई, जबकि वास्तविक रूप से न तो दवाओं की सप्लाई हुई और न ही बैंक के जरिए लेनदेन किया गया।
जांच के दौरान अधिकारियों को कुछ ऐसी फर्मों के बारे में भी जानकारी मिली, जिनके नाम पर करोड़ों रुपये की दवाओं की खरीद और बिक्री दर्ज थी। हालांकि, जब इन फर्मों के ठिकानों पर जांच की गई तो वहां दवाओं का कोई वास्तविक स्टॉक नहीं मिला।
जांच में ‘Augmentin Duo 625’ दवा की बिक्री भी बेहद कम कीमत पर दिखाए जाने का मामला सामने आया। संबंधित कंपनी ने ऐसी किसी बिक्री से इनकार किया, जिसके बाद अधिकारियों का शक और गहरा गया। विभाग को आशंका है कि फर्जी बिलिंग के जरिए नकली दवाओं की सप्लाई और बिक्री का नेटवर्क संचालित किया जा रहा था।
FSDA के अनुसार, जुलाई महीने में नकली और संदिग्ध दवाओं से जुड़े कई मामलों में एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। कार्रवाई के दौरान लाखों रुपये की नकली दवाएं बरामद की गई हैं और कई आरोपियों को गिरफ्तार भी किया गया है। जांच में नकली दवाओं के नेटवर्क के दूसरे राज्यों तक फैले होने के संकेत मिले हैं।
अमीनाबाद की कुछ मेडिकल फर्मों की खरीद-बिक्री पर रोक लगाते हुए उन्हें सील किया गया है। साथ ही संबंधित कारोबारियों के वित्तीय दस्तावेजों और बैंक लेनदेन की जांच की जा रही है।
विभाग के मुताबिक, नकली दवाओं का यह नेटवर्क उत्तर प्रदेश के अलावा राजस्थान और उत्तराखंड तक फैला हो सकता है। FSDA ने सभी जिलों के औषधि निरीक्षकों को संदिग्ध दवा कारोबारियों पर नजर रखने और नियमों का उल्लंघन मिलने पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

