सहारनपुर : दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। एक्सप्रेसवे शुरू होने के करीब तीन महीने बाद ही बड़गांव इंटरचेंज पर देवबंद-नानौता मार्ग के ऊपर बने पुल के निचले हिस्से में दरारें दिखाई देने से स्थानीय लोगों और राहगीरों में चिंता का माहौल है। गुरुवार को एनएचएआई की टीम द्वारा दरारों की मरम्मत के लिए पैचिंग का कार्य किया गया, जिसके बाद ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े किए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हाल ही में शुरू हुए इस एक्सप्रेसवे के पुल में इतनी जल्दी दरारें दिखाई देना गंभीर मामला है। उनका आरोप है कि निर्माण कार्य में अनियमितता या गुणवत्ता से समझौता किया गया हो सकता है। ग्रामीणों ने पूरे निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
आपको बता दें कि सहारनपुर में दो पहले मूसलाधार बारिश हुई थी। बारिश के बाद गुरुवार को एक्सप्रेसवे शुरू होने के करीब तीन महीने बाद ही बड़गांव इंटरचेंज पर देवबंद-नानौता मार्ग के ऊपर बने पुल के निचले हिस्से में दरारें दिखाई देने लगी तो NHAI अधिकारियों में हड़कंप मच गया। पुल के नीचे एनएचएआई कर्मचारियों को पैचिंग करते देख लोगों की चिंता और बढ़ गई। राहगीरों का कहना है कि पुल में दरारें दिखाई देने से दुर्घटना की आशंका बनी रहती है और लोगों के मन में भय का माहौल है।
हालांकि एनएचएआई के प्रोजेक्ट मैनेजर शिवमोहन ने इन आशंकाओं को खारिज किया है। उन्होंने बताया कि पुल के निर्माण के दौरान यदि सीमेंट में मिट्टी का कोई कण रह जाता है तो बरसात के दौरान पानी के बहाव से वह निकल सकता है, जिससे सतही दरारें दिखाई देने लगती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह संरचनात्मक कमजोरी नहीं है और ऐसी दरारों की समय-समय पर पैचिंग की जाती है।
उनके अनुसार पुल पूरी तरह सुरक्षित है और एक्सप्रेसवे पर यातायात सामान्य रूप से संचालित हो रहा है। फिलहाल पुल में आई दरारों और उनकी मरम्मत को लेकर स्थानीय लोगों में चर्चा बनी हुई है। वहीं, एनएचएआई का दावा है कि यह सामान्य तकनीकी प्रक्रिया का हिस्सा है और इससे पुल की मजबूती या यातायात की सुरक्षा पर कोई असर नहीं पड़ता।