90.59 लाख की साइबर ठगी से जुड़ी स्कोडा कार दो साल से थाने में खड़ी, 25 हजार की इनामी श्रद्धा दुबे के नाम पर रजिस्ट्रेशन

Skoda Car of Shraddha Dubey

सहारनपुर : डॉक्टर से 90.59 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले में बरामद की गई लग्जरी स्कोडा कार करीब दो साल से सहारनपुर साइबर क्राइम थाने में खड़ी है। दिल्ली नंबर की इस कार का पंजीकरण 25 हजार रुपये की इनामी श्रद्धा दुबे के नाम पर दर्ज बताया जा रहा है। श्रद्धा दुबे शिवा शर्मा की मौत से जुड़े मामले में आरोपी बताई गई हैं और फरार चल रही हैं। पुलिस ने दिसंबर 2024 में साइबर ठगी के मामले की जांच के दौरान कार को कब्जे में लेकर सीज किया था। अब ठगी की रकम और कार की खरीद के बीच कथित संबंध को लेकर मामला फिर चर्चा में है।

आयुष्मान योजना के नाम पर डॉक्टर से ठगी

मामले की शुरुआत वर्ष 2024 में सहारनपुर के सर्जन डॉ. प्रभात कुमार वर्मा से हुई साइबर ठगी से हुई थी। आरोप है कि जालसाजों ने आयुष्मान योजना के तहत इलाज के बकाया बिलों का भुगतान कराने का झांसा देकर डॉक्टर को अपने जाल में फंसाया। भुगतान की प्रक्रिया पूरी कराने के नाम पर उनसे करीब 90.59 लाख रुपये ठग लिए गए।

बड़ी रकम की धोखाधड़ी सामने आने के बाद मामला पुलिस तक पहुंचा। सहारनपुर साइबर क्राइम थाना पुलिस ने केस दर्ज कर लेनदेन और आरोपियों से जुड़े तथ्यों की जांच शुरू की। जांच में पुलिस ने यह पता लगाने का प्रयास किया कि ठगी से हासिल रकम कहां-कहां इस्तेमाल की गई।

अंकित जायसवाल समेत तीन आरोपी गिरफ्तार

पुलिस की जांच में अंकित जायसवाल का नाम सामने आया। बताया गया कि साइबर ठगी से हासिल रकम का इस्तेमाल स्कोडा कार खरीदने में किया गया था। आरोप है कि कार को अपनी महिला सहयोगी श्रद्धा दुबे के नाम पर पंजीकृत कराया गया। वाहन का रजिस्ट्रेशन दिल्ली के महिपालपुर क्षेत्र में कराया गया था। कार का नंबर DL 6CM 3920 बताया गया है।

एसएसपी अभिनंद के मुताबिक, जांच केवल ठगी की रकम के लेनदेन तक सीमित नहीं रखी गई, बल्कि उससे खरीदी गई संपत्तियों और अन्य संभावित लाभों की भी पड़ताल की गई। इसी सिलसिले में पुलिस टीम लखनऊ पहुंची थी। दिसंबर 2024 में अंकित जायसवाल समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। कार्रवाई के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर स्कोडा कार बरामद कर सीज कर दी गई।

श्रद्धा दुबे के नाम पर दर्ज है कार

इस मामले में कार का पंजीकरण विशेष चर्चा का विषय है। वाहन श्रद्धा दुबे के नाम पर दर्ज बताया जा रहा है, जबकि इसकी खरीद को अंकित जायसवाल से जोड़कर देखा गया। हालांकि, किसी वाहन का दूसरे व्यक्ति के नाम पर पंजीकरण होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि उसे खरीदने में इस्तेमाल की गई रकम का स्रोत क्या था। इसकी पुष्टि के लिए बैंक लेनदेन, खरीद संबंधी दस्तावेज और जांच में जुटाए गए साक्ष्य अहम हैं।

श्रद्धा दुबे का नाम शिवा शर्मा की मौत से जुड़े मामले में भी सामने आया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वह इस मामले में आरोपी हैं और उन पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित है। हालांकि, दोनों मामलों के तथ्यों और कानूनी पहलुओं को अलग-अलग जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर देखा जाना जरूरी है।

दो साल से थाने में खड़ी है कार

करीब दो साल से साइबर क्राइम थाने में खड़ी कार अब इस सवाल को भी सामने ला रही है कि सीज किए गए वाहन की आगे की कानूनी स्थिति क्या होगी। वाहन के स्वामित्व, खरीद में इस्तेमाल हुई रकम और उसे रिलीज किए जाने का फैसला संबंधित दस्तावेजों तथा कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा।

फिलहाल, यह मामला साइबर ठगी के जरिए हासिल रकम के कथित इस्तेमाल और उससे खरीदी गई संपत्ति की जांच का उदाहरण है। कार की खरीद में ठगी की रकम इस्तेमाल होने की बात की अंतिम पुष्टि जांच में उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित कानूनी प्रक्रिया से ही होगी।

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