सहारनपुर : सहारनपुर में अवैध बताई गई मस्जिद को हटाए जाने के बाद विवाद अब राजनीतिक और कानूनी मोड़ ले चुका है। प्रशासन की कार्रवाई के बाद कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने इसे लेकर न सिर्फ जिला प्रशासन पर भड़ास निकाली बल्कि सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मस्जिद के मामले में उनकी लड़ाई किसी राजनीतिक लाभ-हानि के लिए नहीं बल्कि दस्तावेजों और कानूनी आधार पर होगी। इमरान मसूद ने साफ किया कि जरूरत पड़ने पर मामले को हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक ले जाया जाएगा।

आपको बता दें कि कलेक्ट्रेट परिसर में यह मस्जिद करीब 3300 स्क्वायर फीट क्षेत्र में बनी हुई थी। यह दो मंजिला इमारत थी जिसमें दो बड़े हॉल और पांच कमरे बने हुए थे। ग्राउंड फ्लोर पर एक बड़ा हॉल और दो कमरे थे जबकि पहली मंजिल पर हॉल के साथ एक बड़ा कमरा था। इसी परिसर के एक कमरे में डाकघर भी संचालित होता था। शिकायत कर्ता के मुताबिक़ मस्जिद संचालकों द्वारा बाहरी लोगों को किराए पर कमरे दिए हुए थे। कमरों और डाकखाने का किराया मस्जिद के मुअव्वकिल वसूलते थे। मस्जिद को अवैध बताए जाने को लेकर विवाद की शुरुआत 10 फरवरी 2025 को हुई थी।
मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ मस्जिद पक्ष ने 20 जुलाई को जिला कोर्ट का रुख किया। 24 जुलाई को जिला कोर्ट ने मजिस्ट्रेट के आदेश पर स्टे देते हुए मामले की सुनवाई जारी रखी। इसके बाद 2 सितंबर को जिला जज सतेंद्र कुमार की अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखते हुए मस्जिद पक्ष की याचिका खारिज कर दी। इसके बाद प्रशासन की ओर से मस्जिद को हटाने की कार्रवाई की गई। कार्रवाई के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। मस्जिद गिराए जाने के बाद सांसद इमरान मसूद ने एमएलसी शाहनवाज खान के घर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई दस्तावेजों के आधार पर है और वह पीछे हटने वाले नहीं हैं।
इमरान मसूद ने कहा कि “आज हमारे लिए ये काला दिन है। आपने हमारी मस्जिद को गिराकर ठीक नहीं किया।” उन्होंने आरोप लगाया कि मस्जिद पर बुलडोजर चलाकर संविधान के विरुद्ध काम किया गया है। इमरान मसूद ने जमीन के स्वामित्व को लेकर भी सवाल उठाए। सांसद का कहना है कि यदि सरकार इस जमीन पर कार्रवाई कर रही है तो पहले उसे यह साबित करना चाहिए कि जमीन सरकार की है। उनके मुताबिक खाली जमीन पर कार्रवाई की जा सकती है लेकिन जहां मस्जिद बनी हुई है, वहां कार्रवाई से पहले दस्तावेजों और स्वामित्व की स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।
इमरान मसूद ने सरकार और प्रशासन को चेतवानी देते हुए कहा कि यह मामला उनके लिए राजनीतिक लाभ या नुकसान का विषय नहीं है। उन्होंने कहा कि वह अमन पसंद लोग हैं और समाज में प्रेम तथा भाईचारा चाहते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें लड़ाई-झगड़ा पसंद नहीं है। उन्होंने पूरे मामले को “कलम की लड़ाई” बताते हुए कहा कि वह कानूनी और दस्तावेजी आधार पर अपना पक्ष रखेंगे। सांसद ने स्पष्ट किया कि वह मामले को आगे उच्च न्यायालय और जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने की तैयारी में हैं।
अब सहारनपुर का यह मामला प्रशासनिक कार्रवाई से निकलकर व्यापक कानूनी और राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। एक तरफ प्रशासन और अदालत के आदेश हैं, तो दूसरी तरफ मस्जिद पक्ष की ओर से आगे कानूनी लड़ाई की तैयारी की जा रही है। आने वाले दिनों में उच्च अदालतों में होने वाली कार्रवाई से इस विवाद की अगली दिशा तय होगी।

