नई दिल्ली : अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित गबन और अनियमितताओं के मामले ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। कांग्रेस सांसद और लोक लेखा समिति (PAC) के अध्यक्ष केसी वेणुगोपाल ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराने की मांग उठाई है।
अपने पत्र में वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए चढ़ावे में बड़े पैमाने पर चोरी, धोखाधड़ी और हेराफेरी हुई है। उन्होंने कहा कि देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं ने भगवान राम के प्रति आस्था और विश्वास के साथ दान दिया था, लेकिन उस धन का कथित रूप से दुरुपयोग किया गया। उनके अनुसार, इस मामले ने लोगों की धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाई है और पूरे देश में चिंता का माहौल है।
कांग्रेस सांसद ने दावा किया कि शुरुआती जांच से संकेत मिलते हैं कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के भीतर एक सुनियोजित नेटवर्क सक्रिय था। उन्होंने आरोप लगाया कि चंदे की गिनती के दौरान नकदी और कीमती आभूषणों की कथित चोरी की गई तथा बाद में इस मामले को छिपाने के लिए कई महीनों की महत्वपूर्ण सीसीटीवी फुटेज भी मिटा दी गई। उनके अनुसार, यदि यह आरोप सही हैं तो यह केवल कुछ कर्मचारियों की करतूत नहीं बल्कि व्यापक स्तर पर मिलीभगत का मामला हो सकता है।
वेणुगोपाल ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि ट्रस्ट के पूर्व मुख्य लेखा अधिकारी ने वर्ष 2020-21 में कथित अनियमितताओं को लेकर चेतावनी दी थी। उनका दावा है कि सोने-चांदी के बिना हिसाब वाले आभूषण गायब होने की बात उठाने के बजाय उन्हें पद से हटा दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हाल के महीनों में भारतीय स्टेट बैंक ने भी चंदे की गिनती में गड़बड़ी की ओर संकेत किया था, लेकिन उस चेतावनी पर भी प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
कांग्रेस नेता ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि अब तक कार्रवाई केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित रही है, जबकि कथित रूप से जिम्मेदार वरिष्ठ अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों तक जांच नहीं पहुंची है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा जांच से पूरे मामले की निष्पक्ष सच्चाई सामने आना मुश्किल होगा।
अपने पत्र के अंत में वेणुगोपाल ने कहा कि चूंकि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट एक सार्वजनिक ट्रस्ट है, इसलिए उससे पारदर्शिता और जवाबदेही के सर्वोच्च मानकों की अपेक्षा की जाती है। उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि श्रद्धालुओं का विश्वास बनाए रखने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए इसे सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराया जाए।

