हल्द्वानी : शुद्धिकरण मामले को लेकर उत्तराखंड की सियासत गरमाई हुई है। विवाद के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस के पास ऐसा कोई तथ्य या प्रमाण नहीं है, जिससे यह साबित हो कि हल्द्वानी में किसी व्यक्ति को अपमानित करने के उद्देश्य से शुद्धिकरण कराया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि संवेदनशील मामले को राजनीतिक रंग देकर समाज में भ्रम और विभाजन पैदा करने की कोशिश की जा रही है।
मुख्यमंत्री धामी का यह बयान ऐसे समय आया है, जब मामले में एक दिन पहले ही अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। कांग्रेस कार्यकर्ता अंजू की शिकायत पर हल्द्वानी कोतवाली में भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 और 299 के साथ एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(1)(R) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। नैनीताल के एसएसपी मंजूनाथ टीसी ने मामले की जांच एसपी क्राइम जगदीश चंद्र को सौंपी है।
सीएम धामी ने कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए संवेदनशील विषयों को हवा देने के बजाय कांग्रेस को तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर अपनी बात रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज में विभाजन पैदा करने के बजाय सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी लोगों को जोड़ने की होनी चाहिए।
दरअसल, हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रामलीला मैदान में हुई रैली के बाद शुद्धिकरण यज्ञ को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। कांग्रेस ने इसे सामाजिक और जातिगत अपमान से जोड़ते हुए विरोध जताया था। वहीं, मुख्यमंत्री धामी ने इन आरोपों पर सवाल उठाते हुए ठोस प्रमाण सामने रखने की बात कही है।
मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद अब पुलिस जांच महत्वपूर्ण हो गई है। नैनीताल एसएसपी के अनुसार पुलिस को पूरे उत्तराखंड से करीब 80 शिकायतें और याचिकाएं मिली थीं। इनमें नैनीताल जिले की 19 शिकायतें शामिल थीं। कानूनी परीक्षण के बाद अंजू की शिकायत पर हल्द्वानी कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया।
अब जांच में पुलिस शुद्धिकरण यज्ञ के आयोजन, इसमें शामिल लोगों और इसके पीछे की वास्तविक वजह से जुड़े तथ्यों की पड़ताल करेगी। साथ ही वीडियो, सोशल मीडिया पोस्ट और अन्य साक्ष्यों की भी जांच की जा सकती है। फिलहाल मुख्यमंत्री के बयान और एफआईआर के बाद हल्द्वानी का यह मामला एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।

