लखनऊ : साइबर ठगों ने मड़ियांव/फैजुल्लागंज क्षेत्र के 73 वर्षीय बुजुर्ग को आतंकियों की फंडिंग और एनआईए जांच का डर दिखाकर 34 लाख रुपये ठग लिए। जालसाजों ने खुद को पुणे एटीएस का अधिकारी बताया और बुजुर्ग को घंटों वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट रखा। गिरफ्तारी से बचाने और भारतीय रिजर्व बैंक से खातों का सत्यापन कराने का झांसा देकर उनसे जीवनभर की जमा-पूंजी और फिक्स्ड डिपॉजिट तक तुड़वा ली गई।
पीड़ित केशव मुरारी गुप्ता की शिकायत पर साइबर क्राइम थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस उन बैंक खातों को फ्रीज कराने की कोशिश में जुटी है, जिनमें ठगी की रकम ट्रांसफर की गई।
व्हाट्सऐप कॉल से शुरू हुआ ठगी का खेल
पीड़ित के मुताबिक 11 सितंबर की सुबह उनके मोबाइल पर अनजान नंबर से व्हाट्सऐप कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को महाराष्ट्र एटीएस का वरिष्ठ अधिकारी बताया। उसने दावा किया कि केशव मुरारी गुप्ता के नाम से संचालित आईसीआईसीआई बैंक खाते और डेबिट कार्ड के जरिये करोड़ों रुपये आतंकी गतिविधियों में भेजे जा रहे हैं।
जालसाज ने कहा कि मामले की जांच महाराष्ट्र एटीएस और एनआईए संयुक्त रूप से कर रही हैं। बुजुर्ग ने जब खुद को निर्दोष बताया तो आरोपी ने उन्हें वीडियो कॉल पर आने को कहा।
कमरे में बंद रहने का दिया आदेश
आरोपी ने बुजुर्ग को बताया कि मामला बेहद गोपनीय है और इसकी जानकारी किसी परिजन को नहीं दी जा सकती। इसके बाद उन्हें अपने कमरे में बंद रहने और किसी से बातचीत नहीं करने का निर्देश दिया गया।
डर के कारण बुजुर्ग आरोपी के निर्देशों का पालन करते रहे। सुबह से देर शाम तक वीडियो कॉल के जरिए उनसे कथित पूछताछ की जाती रही। इसी दौरान साइबर ठगों ने उन्हें पूरी तरह अपने झांसे में ले लिया।
आरबीआई सत्यापन के नाम पर तुड़वाई एफडी
इसके बाद जालसाजों ने नया डर दिखाया। बुजुर्ग से कहा गया कि उनके बैंक खातों और फिक्स्ड डिपॉजिट में जमा रकम का भारतीय रिजर्व बैंक से सत्यापन कराया जाएगा। दावा किया गया कि जांच पूरी होने के बाद रकम उन्हें वापस कर दी जाएगी और निर्दोष होने का प्रमाणपत्र भी मिलेगा।
गिरफ्तारी के डर में बुजुर्ग ने बैंक में जमा रकम और एफडी तुड़वा दी। इसके बाद करीब 34 लाख रुपये आरटीजीएस और ऑनलाइन माध्यम से बताए गए बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए। रकम ट्रांसफर होते ही जालसाजों ने वीडियो कॉल काट दी। अगले दिन जब रकम वापस नहीं आई और आरोपी से संपर्क भी नहीं हुआ तो बुजुर्ग को ठगी का एहसास हुआ।
5 अक्टूबर को दर्ज कराई शिकायत
घटना के बाद बुजुर्ग सदमे और लोकलाज के कारण कुछ समय तक परिजनों को भी जानकारी नहीं दे सके। लगातार मानसिक तनाव के बाद उन्होंने 5 अक्टूबर को साइबर क्राइम थाने पहुंचकर पुलिस को पूरी घटना बताई।
साइबर क्राइम थाना प्रभारी इंस्पेक्टर आलोक राव के मुताबिक पीड़ित की तहरीर पर अज्ञात साइबर अपराधियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। जिन बैंक खातों में रकम भेजी गई है, उनकी जानकारी संबंधित बैंकों से मांगी गई है।
पुलिस का प्रयास है कि खातों को जल्द फ्रीज कराकर रकम को होल्ड कराया जा सके। इसके साथ ही ठगी में इस्तेमाल मोबाइल नंबरों, बैंक खातों के आईपी एड्रेस और लोकेशन समेत अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच की जा रही है।

