सेवानिवृत्त शिक्षक और पूर्व सैनिक कर सकेंगे पंजीकरण
इस पोर्टल के जरिए सेवानिवृत्त शिक्षकों और पूर्व सैनिकों को विशेष रूप से जोड़ा जाएगा। इसके अलावा शिक्षण में रुचि रखने वाले अन्य योग्य व्यक्ति भी स्वयंसेवक के रूप में पंजीकरण करा सकेंगे।
सरकार को उम्मीद है कि अनुभवी लोगों की भागीदारी से विद्यार्थियों को पढ़ाई में अतिरिक्त सहायता मिलेगी। सेवानिवृत्त शिक्षक अपने अनुभव से बच्चों को विषयों को समझने में मदद कर सकेंगे, जबकि पूर्व सैनिक अनुशासन और जीवन से जुड़े व्यावहारिक अनुभवों के माध्यम से उनका मार्गदर्शन कर सकेंगे।
एडीसी की अध्यक्षता में बनेगी कमेटी
स्वयंसेवकों के चयन के लिए जिला स्तर पर एक समिति गठित की जाएगी। इसकी अध्यक्षता अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) करेंगे। समिति में डीएसपी स्तर का पुलिस अधिकारी भी शामिल होगा।
जिला स्तरीय कमेटी पंजीकरण कराने वाले इच्छुक व्यक्तियों पर विचार करेगी और अपनी सिफारिश के आधार पर उन्हें स्कूलों में पढ़ाने की जिम्मेदारी से जोड़ा जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य चयन प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाना और योग्य स्वयंसेवकों को शिक्षा व्यवस्था से जोड़ना है।
उम्र की अधिकतम सीमा का बंधन नहीं
इस पहल की खास बात यह है कि स्वयंसेवक के रूप में पंजीकरण के लिए अधिकतम उम्र की कोई सख्त सीमा नहीं रखी गई है। सरकार का जोर उम्र के बजाय आवेदक की योग्यता, अनुभव और पढ़ाने की रुचि पर है।
इससे सेवानिवृत्त शिक्षक और पूर्व सैनिक भी अपनी क्षमता के अनुसार विद्यार्थियों की शिक्षा में योगदान दे सकेंगे। अन्य योग्य नागरिक भी इस पहल से जुड़कर स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई में सहयोग कर सकते हैं। इच्छुक लोगों को पंजीकरण और चयन से संबंधित विस्तृत शर्तों की पुष्टि आधिकारिक पोर्टल या संबंधित विभाग से करनी चाहिए।
शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की पहल
हरियाणा सरकार की इस पहल से स्कूलों में विद्यार्थियों को अतिरिक्त शैक्षणिक सहयोग मिलने की उम्मीद है। अनुभवी स्वयंसेवकों की भागीदारी से बच्चों की विषय संबंधी समझ बेहतर करने और उन्हें व्यावहारिक ज्ञान देने में मदद मिल सकती है।
स्वयंसेवक शिक्षक पंजीकरण पोर्टल के जरिए सरकार शिक्षा व्यवस्था में समाज की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में कदम उठा रही है। योजना की सफलता स्वयंसेवकों के पंजीकरण, चयन और स्कूलों में उनकी प्रभावी भागीदारी पर निर्भर करेगी।

