आटा चक्की में बिजली चोरी के पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बावजूद कार्रवाई नहीं करने का आरोप, चार विजिलेंस कर्मचारियों पर कार्रवाई के निर्देश
उन्नाव : बिजली चोरी रोकने के लिए गठित विजिलेंस टीम की कार्यप्रणाली पर एक गंभीर सवाल खड़ा हुआ है। सिधौली स्थित एक आटा चक्की में 22 जुलाई को की गई चेकिंग के दौरान बिजली चोरी के पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई। बाद में विभागीय जांच में सामने आए तथ्यों ने विजिलेंस टीम की रिपोर्ट पर ही सवाल खड़े कर दिए। मामले में विभाग को करीब 10 लाख 90 हजार 376 रुपये की संभावित राजस्व हानि होने की बात सामने आई है।
प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक संदीप भार्गव ने चार विजिलेंस कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसके लिए अपर पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजकर कार्रवाई सुनिश्चित कराने और इसकी जानकारी निगम मुख्यालय को उपलब्ध कराने को कहा गया है।
22 जुलाई को हुई थी चेकिंग
मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक की ओर से 2 सितंबर को जारी पत्र में अधीक्षण अभियंता, विद्युत वितरण खंड दही चौकी, उन्नाव की जांच आख्या का हवाला दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार 22 जुलाई को आटा चक्की में हुई चेकिंग के दौरान विभागीय स्तर से अवर अभियंता (प्रवर्तन) दिनेश कुमार के साथ विजिलेंस टीम के प्रभारी उपनिरीक्षक सुरेश कुमार, महिला उपनिरीक्षक लक्ष्मीबाला, मुख्य आरक्षी सलमान वारसी और आरक्षी शैलेन्द्र कुमार सिंह मौजूद थे।
चेकिंग के दौरान विजिलेंस टीम ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि आटा चक्की डीजल इंजन से चल रही थी। परिसर के पास पोल से जुड़ा एक अतिरिक्त केबल भी मिला, लेकिन उसे मीटर से जुड़ा हुआ नहीं पाया गया। टीम ने अपनी रिपोर्ट में साक्ष्यों के अभाव का हवाला देते हुए बिजली चोरी की एफआईआर दर्ज नहीं कराई।
विभागीय जांच में बदल गई तस्वीर
मामला सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर इसकी जांच कराई गई। जांच के दौरान मौके के वीडियो और अन्य साक्ष्यों का भी अवलोकन किया गया। विभागीय रिपोर्ट के मुताबिक पोल से खींचा गया अतिरिक्त तार चक्की में मौजूद संयंत्रों तक जाता हुआ दिखाई दे रहा था।
जांच में यह भी सामने आया कि परिसर में 26 हॉर्सपावर का थ्री-फेज कनेक्शन लगा हुआ था। मीटर संख्या 3606756 की MRI जांच में पिछले एक साल के दौरान अधिकतम मांग करीब 18 हॉर्सपावर और पिछले छह महीनों में करीब 14 से 15 हॉर्सपावर के आसपास पाई गई।
विभागीय जांच रिपोर्ट में वीडियो, स्थानीय निरीक्षण और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर माना गया कि मामले में विद्युत अधिनियम की धारा 135 के तहत अभियोग दर्ज किया जाना चाहिए था। रिपोर्ट के अनुसार एफआईआर दर्ज नहीं होने के कारण विभाग को राजस्व का नुकसान हुआ।
10.90 लाख रुपये की संभावित हानि
जांच में कुल 10 लाख 90 हजार 376 रुपये की संभावित राजस्व हानि बताई गई है। इसमें 8 लाख 70 हजार 376 रुपये राजस्व निर्धारण और 2 लाख 20 हजार रुपये शमन शुल्क शामिल है। विभागीय जांच में एफआईआर नहीं होने को गंभीर लापरवाही माना गया है। इसके बाद मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक ने संबंधित विजिलेंस कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए।
अपर पुलिस अधीक्षक को भेजा गया पत्र
प्रबंध निदेशक की ओर से अपर पुलिस अधीक्षक, मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड को पत्र भेजकर संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है। साथ ही कार्रवाई की जानकारी निगम मुख्यालय को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
हालांकि, इस मामले में अभी तक कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं है। उन्नाव के अधीक्षण अभियंता अमीय कुमार सिंह ने बताया कि उन्हें इस प्रकरण से संबंधित कोई जानकारी नहीं है। वहीं प्रबंध निदेशक की ओर से अपर पुलिस अधीक्षक को भेजे गए पत्र पर भी अभी तक कार्रवाई नहीं होने की बात सामने आई है।
ऐसे में बिजली चोरी रोकने के लिए गठित विजिलेंस टीम की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। एक तरफ विभाग लगातार बिजली चोरी के खिलाफ कार्रवाई का दावा करता है, वहीं इस मामले में विभागीय जांच ने शुरुआती विजिलेंस रिपोर्ट के विपरीत तस्वीर पेश की है। अब निगाह इस बात पर है कि संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है और बिजली विभाग को हुए संभावित राजस्व नुकसान की भरपाई किस तरह की जाती है।

