गोरखपुर : पर्यटन और उद्योग के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा गोरखपुर अब मत्स्य उत्पादन, शोध और मछली कारोबार के क्षेत्र में भी नई पहचान बनाने की तैयारी में है। योगी सरकार पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्राकृतिक जलीय संपदा को आर्थिक ताकत में बदलने के लिए गोरखपुर में करीब 35 एकड़ क्षेत्र में फिशरीज कॉलेज, इंटरनेशनल फिश रिसर्च सेंटर, अत्याधुनिक एक्वा पार्क और मॉडल फिश मंडी विकसित करने की योजना पर आगे बढ़ रही है। पूरी परियोजना पर करीब 200 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप विकसित किए जा रहे इस केंद्र का उद्देश्य मत्स्य उत्पादन से लेकर वैज्ञानिक शोध, उच्च शिक्षा, प्रोसेसिंग और संगठित बाजार तक पूरी व्यवस्था को एक ही जगह जोड़ना है। प्रस्तावित केंद्र गोरखपुर-वाराणसी मार्ग पर निर्माणाधीन इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम के समीप ताल कंदला क्षेत्र में विकसित किए जाने की योजना है।
35 एकड़ में खुलेगा फिशरीज कॉलेज
मत्स्य विभाग ने फिशरीज कॉलेज के लिए ताल नदौर क्षेत्र में करीब 35 एकड़ भूमि चिह्नित की है। यहां स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर मत्स्य विज्ञान से जुड़े पाठ्यक्रम संचालित किए जाएंगे। इनमें बीएफएससी और एमएफएससी के साथ जलीय जीव स्वास्थ्य प्रबंधन, मछली आहार एवं पोषण तथा फिश प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी जैसे विषय शामिल होंगे।
मत्स्य विभाग के उप निदेशक बृजेश कुमार के मुताबिक पूर्वांचल में पारंपरिक मत्स्य पालन को आधुनिक तकनीक और उद्यमिता से जोड़ने के लिए पूर्णकालिक फिशरीज कॉलेज की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए जरूरी औपचारिकताओं को पूरा किया जा रहा है। कॉलेज की डीपीआर लोक निर्माण विभाग की ओर से तैयार कर अंतिम रूप दिया जा चुका है।
शोध के साथ आधुनिक हैचरी पर जोर
गोरखपुर में मत्स्य क्षेत्र को शोध और तकनीक से जोड़ने के लिए प्रदेश सरकार ने अंतरराष्ट्रीय शोध संस्था ‘वर्ल्ड फिश’ के साथ तीन वर्ष के समझौते को मंजूरी दी है। इसके तहत छपिया स्थित सरकारी हैचरी को अत्याधुनिक ब्रीडर हैचरी और इंटरनेशनल फिश रिसर्च सेंटर के रूप में विकसित किए जाने की योजना है।
इससे मछली की उन्नत प्रजातियों, बेहतर प्रजनन तकनीक, मछली स्वास्थ्य और उत्पादन से जुड़ी वैज्ञानिक जानकारी को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इसका सीधा लाभ पूर्वांचल के मत्स्य पालकों तक पहुंचाने की योजना है।
एक्वा पार्क और मॉडल फिश मंडी से मिलेगा बाजार
मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के साथ उत्पादित मछलियों के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराना भी परियोजना का अहम हिस्सा है। इसी उद्देश्य से ताल कंदला में मॉडल होलसेल फिश मंडी और एकीकृत एक्वा पार्क विकसित करने की योजना बनाई गई है।
परियोजना के लिए भूमि का सर्वे पूरा हो चुका है और निर्माण के लिए कार्यदायी संस्था के रूप में कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज (सीएंडडीएस) का चयन किया गया है। एक्वा पार्क में आधुनिक कोल्ड स्टोरेज और आइस प्लांट की सुविधा प्रस्तावित है, जिससे मछलियों की शेल्फ लाइफ बढ़ाई जा सकेगी।
इसके अलावा अत्याधुनिक कटिंग, पैकेजिंग और हाइजीनिक बिक्री प्लेटफॉर्म भी विकसित किए जाएंगे। इससे मछली के उत्पादन से लेकर उपभोक्ता तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और स्वच्छ बनाने में मदद मिलेगी।
बिहार और नेपाल तक बनेगा बाजार नेटवर्क
परियोजना के जरिए गोरखपुर और आसपास के जिलों के साथ-साथ पड़ोसी राज्य बिहार तथा नेपाल सीमा क्षेत्र तक एक बेहतर कोल्ड-चेन और विपणन नेटवर्क विकसित करने की योजना है। इससे स्थानीय मत्स्य पालकों को अपनी उपज के लिए संगठित बाजार मिलने की उम्मीद है और बिचौलियों पर निर्भरता भी कम हो सकती है।
रोजगार और आय बढ़ाने की उम्मीद
प्रस्तावित फिशरीज कॉलेज, रिसर्च सेंटर और एक्वा पार्क को एक-दूसरे से जोड़कर गोरखपुर को मत्स्य क्षेत्र का शिक्षा, शोध, उत्पादन, प्रोसेसिंग और बाजार का एकीकृत केंद्र बनाने की तैयारी है।
सरकार का मानना है कि इस परियोजना से स्थानीय युवाओं के लिए मत्स्य विज्ञान और इससे जुड़े क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। वहीं आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक प्रशिक्षण मिलने से मत्स्य पालकों की उत्पादकता और आय बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।
मत्स्य मंत्री डॉ. संजय निषाद के मुताबिक मत्स्य पालकों के हित में लंबे समय से देखे जा रहे इस सपने को अब जमीन पर उतारने की दिशा में काम आगे बढ़ रहा है। करीब 200 करोड़ रुपये की प्रस्तावित परियोजना को पूर्वांचल में ‘नीली क्रांति’ को गति देने वाली बड़ी पहल के रूप में देखा जा रहा है।

