ड्रग्स तस्करी पर भारत सख्त, डार्क वेब और केमिकल सप्लाई चेन पर कसेगा शिकंजा

ड्रग्स तस्करी पर भारत सख्त, डार्क वेब और केमिकल सप्लाई चेन पर कसेगा शिकंजा

नई दिल्ली : सीमा पार ड्रग्स तस्करी पर लगाम लगाने के लिए भारत ने क्षेत्रीय सहयोग मजबूत करने की अपील की है। नई दिल्ली में मंगलवार को आयोजित बिम्सटेक के गृह मंत्रियों की पहली बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नशीले पदार्थों की तस्करी, ड्रग्स बनाने में इस्तेमाल होने वाले केमिकल्स की निगरानी और डार्क वेब के जरिए होने वाले वित्तीय लेनदेन पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ड्रग्स का अवैध कारोबार केवल आपराधिक गतिविधि नहीं, बल्कि युवाओं, समाज और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य पर हमला है।

अमित शाह ने जोर दिया कि ड्रग्स तस्करी जैसी सीमा पार की चुनौती से निपटने के लिए अलग-अलग देशों की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। इसके लिए खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान, वित्तीय जांच और संयुक्त कार्रवाई को मजबूत करना होगा। उन्होंने आगाह किया कि नशीले पदार्थों से होने वाली कमाई संगठित अपराध को आर्थिक ताकत देती है और इसका इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों की फंडिंग में भी किया जा सकता है।

गोल्डन ट्राएंगल पर भारत की नजर

गृह मंत्री ने ड्रग्स तस्करी को ‘डेथ ट्रैफिकिंग’ बताते हुए कहा कि इस अवैध कारोबार में कुछ भी ‘गोल्डन’ नहीं है। उनका संदर्भ गोल्डन ट्राएंगल क्षेत्र से था, जिसमें म्यांमार, थाईलैंड और लाओस के हिस्से शामिल हैं। यह क्षेत्र लंबे समय से सिंथेटिक ड्रग्स और अन्य नशीले पदार्थों के उत्पादन तथा तस्करी के लिए जाना जाता है।

भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के नजदीक होने के कारण यह क्षेत्र देश की आंतरिक सुरक्षा और नशा नियंत्रण के लिहाज से महत्वपूर्ण है। सीमावर्ती इलाकों में संघर्ष, दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां और निगरानी की चुनौतियां तस्करी रोकने के प्रयासों को मुश्किल बनाती हैं।

डार्क वेब और केमिकल्स की निगरानी पर जोर

अमित शाह ने ड्रग्स बनाने में इस्तेमाल होने वाले रसायनों और डार्क वेब के जरिए होने वाले लेनदेन को बड़ी चुनौती बताया। वैध उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले कुछ रसायनों का दुरुपयोग अवैध नशीले पदार्थ बनाने में किया जा सकता है। ऐसे में इनकी सप्लाई चेन पर निगरानी और संदिग्ध खेपों की पहचान जरूरी है।

इसी तरह, डार्क वेब और एन्क्रिप्टेड डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल अपराधी अवैध खरीद-बिक्री और वित्तीय लेनदेन छिपाने के लिए कर सकते हैं। इन नेटवर्कों का पता लगाने के लिए सदस्य देशों के बीच वित्तीय खुफिया जानकारी और जांच संबंधी सूचनाएं साझा करने पर जोर दिया गया।

बिम्सटेक देशों के बीच पांच प्रमुख समझौते

बैठक में भारत, बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। चर्चा में ड्रग्स नियंत्रण, आतंकवाद विरोधी सहयोग, साइबर सुरक्षा, कानूनी सहायता और भगोड़े अपराधियों की वापसी जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।

बैठक में ड्रग्स और उससे जुड़े रसायनों की अवैध तस्करी रोकने के लिए कार्ययोजना को मंजूरी दी गई। मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी फंडिंग से निपटने के लिए प्रशिक्षण, वित्तीय जांच, संपत्ति की बरामदगी और अनुभव साझा करने पर भी सहमति बनी।

बैठक में दिल्ली घोषणा-पत्र अपनाया गया, जिसमें सीमा पार आतंकवाद, मानव तस्करी, साइबर अपराध और संगठित अपराध के खिलाफ सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया। अमित शाह ने कहा कि बिम्सटेक क्षेत्र का इस्तेमाल आतंकवादी नेटवर्कों को सुरक्षित पनाहगाह, फंडिंग या हमलों की योजना बनाने के लिए नहीं करने दिया जाना चाहिए।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया NPR BHARAT NEWS के Facebook पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें...

Related posts