इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। जांच एजेंसी अब भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और इसमें शामिल अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। मामले में तत्कालीन पशुधन मंत्री राजकिशोर सिंह की भूमिका भी चर्चा में है। हालांकि, उनके खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति से जुड़ी फाइल शासन में लंबित बताई गई है।
2014 में हुई थी 1,198 पदों पर भर्ती परीक्षा
पशुधन प्रसार अधिकारी भर्ती परीक्षा वर्ष 2014 में तत्कालीन अखिलेश यादव सरकार के कार्यकाल में आयोजित की गई थी। उत्तर प्रदेश के 17 मंडलों में कुल 1,198 पदों को भरने के लिए दो फरवरी 2014 को परीक्षा हुई थी। इसके बाद चयन प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन भर्ती के तौर-तरीकों पर गंभीर सवाल उठने लगे।
जांच के दौरान भर्ती नियमों को कथित तौर पर दरकिनार करने और चयन प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप सामने आए। आरोप है कि ओएमआर शीट का मूल्यांकन निर्धारित व्यवस्था के विपरीत केंद्रीकृत तरीके से कराया गया। इसके अलावा मंडलीय चयन समितियों के अधिकार समाप्त किए जाने का मामला भी जांच के दायरे में आया। जांच एजेंसी इन बिंदुओं के आधार पर यह पता लगाने में जुटी है कि भर्ती प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन किस स्तर पर हुआ और इसके लिए कौन-कौन जिम्मेदार था।
तत्कालीन पशुधन मंत्री की भूमिका पर भी नजर
भर्ती के समय समाजवादी पार्टी की सरकार सत्ता में थी और राजकिशोर सिंह पशुधन मंत्री थे। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उनके खिलाफ अभियोजन स्वीकृति से संबंधित फाइल फिलहाल शासन में लंबित है। योगेश कुमार की गिरफ्तारी के बाद मामले में आगे की जांच और संभावित कार्रवाई को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
राजकिशोर सिंह वर्ष 2024 में समाजवादी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए थे। हालांकि, किसी व्यक्ति की राजनीतिक संबद्धता अपने आप में किसी अपराध में संलिप्तता का प्रमाण नहीं है। मामले में उनकी भूमिका को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
पूछताछ में सामने आ सकते हैं अहम तथ्य
योगेश कुमार वरिष्ठ प्रशासनिक पद पर रह चुके हैं। ऐसे में उनकी गिरफ्तारी को भर्ती घोटाले की जांच में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। ईओडब्ल्यू उनसे पूछताछ कर भर्ती प्रक्रिया में लिए गए फैसलों, कथित अनियमितताओं और संबंधित अधिकारियों की भूमिका के बारे में जानकारी जुटा रही है।
जांच का मुख्य उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि चयन प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी कैसे हुई, नियमों में बदलाव या उनके उल्लंघन के पीछे कौन जिम्मेदार था और क्या इस मामले में अन्य अधिकारियों की भी भूमिका रही।
फिलहाल, गिरफ्तारी के बाद जांच के अगले चरण पर नजर बनी हुई है। मामले में अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई होगी या नहीं, यह जांच में सामने आने वाले तथ्यों और कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। भर्ती घोटाले की पूरी तस्वीर जांच पूरी होने और अदालत में तथ्यों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

