फिरोजाबाद : समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय मुख्य महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव ने प्रधानमंत्री के पिता को लेकर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष की ओर से की गई टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि राजनीति में नेताओं को अपनी भाषा पर संयम रखना चाहिए। वह कांग्रेस अध्यक्ष की इस टिप्पणी से बिल्कुल सहमत नहीं हैं और इस तरह के बयान से खुद को अलग रखते हैं। उन्होंने कहा कि जब बड़े नेता ही इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करेंगे, तो छोटे नेताओं से क्या उम्मीद की जा सकती है। इससे राजनीतिक संवाद का स्तर और खराब हो सकता है।
राजनीतिक बयानबाजी में भाषा की मर्यादा जरूरी
शिक्षक और स्नातक एमएलसी चुनाव के सिलसिले में फिरोजाबाद पहुंचे प्रो. रामगोपाल यादव पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान उनसे कांग्रेस अध्यक्ष की ओर से प्रधानमंत्री के पिता को लेकर की गई टिप्पणी पर सवाल पूछा गया। जवाब में उन्होंने स्पष्ट किया कि वह इस तरह की भाषा से सहमत नहीं हैं।
प्रो. यादव ने कहा कि राजनीति में सभी नेताओं को अपनी भाषा की मर्यादा बनाए रखनी चाहिए। सार्वजनिक जीवन में बड़े नेताओं की जिम्मेदारी और भी अधिक होती है, क्योंकि उनके बयानों का प्रभाव अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं पर भी पड़ता है।
उन्होंने कहा कि यदि वरिष्ठ नेता ही अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करेंगे, तो छोटे नेताओं से संयम की उम्मीद करना मुश्किल हो जाएगा। ऐसी परंपरा आगे बढ़ी तो राजनीतिक माहौल और बिगड़ सकता है। उनके बयान में राजनीतिक मतभेदों के बावजूद संवाद की मर्यादा बनाए रखने पर जोर दिया गया।
वरिष्ठ नेताओं को देना चाहिए जिम्मेदारी का संदेश
रामगोपाल यादव ने अपने बयान के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि राजनीतिक विरोध और व्यक्तिगत टिप्पणी के बीच अंतर होना चाहिए। नेताओं को नीतियों, कामकाज और विचारधारा के आधार पर एक-दूसरे की आलोचना करनी चाहिए। सार्वजनिक मंचों पर इस्तेमाल किए जाने वाले शब्दों का असर केवल संबंधित नेताओं तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव राजनीतिक कार्यकर्ताओं और आम जनता पर भी पड़ता है।
उनके मुताबिक, शीर्ष स्तर के नेताओं को अपने आचरण से उदाहरण पेश करना चाहिए। अगर राजनीतिक दलों के प्रमुख नेता ही भाषा के संयम का ध्यान नहीं रखेंगे, तो राजनीतिक संवाद में कटुता बढ़ने की आशंका बनी रहेगी।
राहुल गांधी के बयान पर टिप्पणी से किया इनकार
पत्रकारों से बातचीत के दौरान प्रो. रामगोपाल यादव से अन्य राजनीतिक मुद्दों पर भी सवाल पूछे गए। राहुल गांधी के चुनाव आयोग से संबंधित बयान पर उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। इस मुद्दे पर उन्होंने कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी।
वहीं, एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के उत्तर प्रदेश में भाजपा को हटाने के दावे से जुड़े सवाल पर उन्होंने मीडिया की भूमिका का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि प्रेस की जिम्मेदारी है कि वह जनता के सामने सही तथ्य रखे। उनके इस बयान को राजनीतिक घटनाक्रम के बीच मीडिया की जिम्मेदारी पर जोर देने के रूप में देखा जा रहा है।
एमएलसी चुनाव में अच्छे नतीजों की उम्मीद
प्रो. रामगोपाल यादव इन दिनों शिक्षक और स्नातक एमएलसी चुनाव के सिलसिले में दौरे पर हैं। चुनावी तैयारियों और परिणामों को लेकर उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों क्षेत्रों में समाजवादी पार्टी को अच्छे नतीजे मिलेंगे।
उन्होंने कहा कि चुनाव में अंतिम फैसला जनता के हाथ में होता है। जनता जनार्दन ही तय करती है कि किस पार्टी और उम्मीदवार को समर्थन देना है। पार्टी को उम्मीद है कि चुनाव में उसे जनता का सहयोग मिलेगा।
एमएलसी चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों के बीच गतिविधियां तेज हैं। ऐसे में रामगोपाल यादव का यह बयान राजनीतिक भाषा की मर्यादा और चुनावी माहौल, दोनों संदर्भों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, चुनाव के नतीजे आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि समाजवादी पार्टी को दोनों क्षेत्रों में कितना समर्थन मिलता है।

