सहारनपुर : नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने सोमवार को सहारनपुर में कथित राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भगवान राम के नाम पर सत्ता हासिल करने वाली भाजपा अब उसी आस्था के नाम पर जुटाए गए चढ़ावे की धनराशि को लेकर उठ रहे सवालों से बचने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि मामले में बड़े लोगों को बचाया जा रहा है, जबकि छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई का दिखावा किया जा रहा है। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की।
सांसद चंद्रशेखर आजाद शब्बीरपुर कांड से जुड़े मामले में सुनवाई के लिए सहारनपुर स्थित एमपी-एमएलए कोर्ट पहुंचे थे। अदालत से अगली तारीख मिलने के बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत की और राम मंदिर चढ़ावा विवाद, उत्तराखंड की स्थिति तथा अन्य राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। राम मंदिर चढ़ावा मामले पर बोलते हुए चंद्रशेखर ने कहा कि भगवान को धन की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि उनके नाम पर राजनीति और कारोबार करने वालों को पैसों की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने भगवान राम के नाम पर राजनीति की, चुनाव जीते और अब मंदिरों में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए धन को लेकर गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं। उनका कहना था कि यह कोई छोटी रकम का मामला नहीं है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
उन्होंने जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि बिना एफआईआर दर्ज किए एसआईटी का गठन किया गया, जिससे पूरे मामले की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि आरोप इतने गंभीर हैं तो पहले विधिक प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि अगर इतनी बड़ी धनराशि विकास कार्यों में खर्च होती तो कई गांवों की तस्वीर बदल सकती थी। सांसद ने कहा कि इस पूरे मामले में बड़े अधिकारियों तक के नाम सामने आने की चर्चाएं हैं। ऐसे में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और आयकर विभाग जैसी केंद्रीय एजेंसियां आखिर चुप क्यों हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि छोटे मामलों में ये एजेंसियां तत्काल सक्रिय हो जाती हैं, लेकिन इस मामले में उनकी निष्क्रियता कई सवाल पैदा करती है।
चंद्रशेखर ने यह भी कहा कि यदि इस्तीफा देने वाले अधिकारी या अन्य संबंधित लोग निर्दोष हैं तो फिर उन्हें अपने पद छोड़ने की जरूरत क्यों पड़ी। उनके अनुसार इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच से ही सच्चाई सामने आ सकेगी। मीडिया से बातचीत के दौरान सांसद ने उत्तराखंड में पीड़ित परिवारों से मिलने से रोके जाने के मुद्दे पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि यदि वहां केवल स्थानीय पुलिस होती तो वह बातचीत कर स्थिति स्पष्ट कर सकते थे, लेकिन उनके सामने पैरामिलिट्री फोर्स तैनात कर दी गई। उन्होंने कहा कि उनका अर्द्धसैनिक बलों से कोई विवाद नहीं है और वह हमेशा संसद में उनके अधिकारों की आवाज उठाते रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें पीड़ित परिवारों से मिलने नहीं दिया गया, जबकि उनका उद्देश्य केवल उनकी समस्याएं सुनना था। इससे यह संदेश जाता है कि प्रशासन सच्चाई को सामने आने से रोकना चाहता है। उन्होंने दावा किया कि पीड़ित परिवारों ने उनसे कहा है कि यदि उन्हें मिलने नहीं दिया गया तो वे अपनी बात रखने के लिए दिल्ली जाकर धरना देंगे, क्योंकि उन्हें खुद को सुरक्षित महसूस नहीं हो रहा है। उत्तराखंड में कथित धमकियों का जिक्र करते हुए सांसद ने कहा कि एक पंचायत में खुलेआम कहा गया कि यदि कोई वहां आएगा तो उसके टुकड़े कर दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह धमकी उन्हें व्यक्तिगत रूप से नहीं, बल्कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और पूरे कानून-व्यवस्था तंत्र को दी गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या देश के किसी राज्य में एक सांसद अपने ही नागरिकों से मिलने भी नहीं जा सकता।
उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तराखंड में पहले मुसलमानों, फिर पर्यटकों और बाद में सिख समुदाय के लोगों के साथ भी घटनाएं हुई हैं। उनके अनुसार कुछ लोग जानबूझकर प्रदेश का सामाजिक माहौल बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि वह 30 जून को एक बार फिर उत्तराखंड जाएंगे और वहां के पीड़ित लोगों से मिलने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक की पीड़ा सुनी जानी चाहिए और न्याय दिलाना जनप्रतिनिधियों का दायित्व है। उन्होंने भरोसा जताया कि उनकी पार्टी लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ आगे बढ़ रही है और भविष्य में लिए जाने वाले सभी महत्वपूर्ण निर्णय सार्वजनिक रूप से जनता के सामने रखे जाएंगे।
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