मुजफ्फरनगर में 2013 के पुराने मुकदमे से 22 नेताओं को बड़ी राहत, MP-MLA कोर्ट ने मुकदमा वापस लेने की दी अनुमति, भाजपा-सपा के कई बड़े नेताओं के नाम थे शामिल

MP-MLA कोर्ट ने मुकदमा वापस लेने की दी अनुमति भाजपा-सपा के कई बड़े नेताओं के नाम थे शामिल

मुजफ्फरनगर : जिले में वर्ष 2013 में दर्ज एक पुराने राजनीतिक मामले में भाजपा और सपा से जुड़े 22 नेताओं और कार्यकर्ताओं को बड़ी राहत मिली है। एमपी-एमएलए कोर्ट ने शासन के आदेश के अनुपालन में अभियोजन की ओर से दाखिल मुकदमा वापसी के प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए वाद वापस लेने की अनुमति दे दी है। अदालत के इस आदेश के बाद करीब 13 साल पुराने मामले में नामजद अधिकांश आरोपियों को राहत मिल गई है।

यह मामला सिखेड़ा थाना क्षेत्र का है। मुकदमा अपराध संख्या 173/2013 के तहत दर्ज इस केस में तत्कालीन एडीएम प्रशासन की ओर से धारा 144 के उल्लंघन को लेकर शिकायत की गई थी। अभियोजन के अनुसार, संबंधित नेता और उनके समर्थक ट्रैक्टर, मोटरसाइकिल और पैदल जनता इंटर कॉलेज पहुंचे थे। वहां जनसभा करने का आरोप लगाया गया था। इसी दौरान सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया।

मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 188, 341, 353 और 7 क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट के तहत कार्रवाई की गई थी। लंबे समय तक यह मामला न्यायालय में विचाराधीन रहा। बाद में शासन की ओर से मुकदमा वापस लेने के संबंध में निर्देश जारी किए गए। शासन के 28 फरवरी 2026 के आदेश के अनुपालन में अभियोजन की ओर से धारा 321 सीआरपीसी के तहत एमपी-एमएलए कोर्ट में प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया।

अदालत में अभियोजन पक्ष ने शासन के आदेश और मामले से जुड़े तथ्यों को रखा। लोक अभियोजक राहुल सिंह ने अभियोजन की ओर से पैरवी की। पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने वाद वापस लेने की अनुमति प्रदान कर दी। इस मुकदमे में कई प्रमुख राजनीतिक नेताओं के नाम शामिल थे। इनमें पूर्व मंत्री उमेश मलिक, पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान, सुरेश राणा, राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल, साध्वी प्राची, अशोक कंसल, अशोक कटारिया, कुंवर भारतेंदु, श्यामपाल, बिट्टू आचार्य, दीपक नरसिंहा उर्फ दीपक त्यागी और सोहनवीर समेत कई नेता और कार्यकर्ता शामिल थे। सपा सांसद हरेंद्र मलिक, यशपाल पंवार और शिव कुमार के नाम भी मुकदमे में सामने आए थे।

आयुक्त एवं निदेशक अभियोजन श्यामधर द्विवेदी ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2013 में तत्कालीन एडीएम प्रशासन की शिकायत पर धारा 144 के उल्लंघन के मामले में मुकदमा दर्ज हुआ था। शासन से वाद वापसी के निर्देश प्राप्त होने के बाद नियमानुसार न्यायालय में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया। उन्होंने बताया कि अदालत ने अभियोजन के तर्कों और शासन के आदेश पर विचार करने के बाद मुकदमा वापस लेने की अनुमति दी। अभियोजन के अनुसार, मामले को राजनीतिक प्रकृति का मानते हुए लोकहित और जनहित के आधार पर वाद वापसी की कार्रवाई की गई। हालांकि, इस मामले में शिव कुमार की पत्रावली अलग कर दी गई है, जबकि वीरेंद्र सिंह की मृत्यु हो चुकी है। अदालत के आदेश के बाद वर्ष 2013 से चले आ रहे इस पुराने मुकदमे में नामजद अन्य आरोपियों को बड़ी कानूनी राहत मिली है।

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