सहारनपुर : देश 79वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। शहर से लेकर गांव-देहात तक तिरंगा फहराया जा रहा है और देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीर शहीदों को याद किया जा रहा है। इन शहीदों में युवाओं के सबसे बड़े प्रेरणास्रोतों में शहीद-ए-आजम भगत सिंह का नाम सबसे ऊपर आता है। भगत सिंह के जीवनकाल से जुड़ी कुछ तस्वीरें आज भी इतिहास की अनमोल धरोहर हैं, लेकिन इनमें उनकी हैट वाली तस्वीर सबसे ज्यादा चर्चित है। सिर पर तिरछी हैट, चेहरे पर गंभीरता और आंखों में बेखौफ आत्मविश्वास लिए भगत सिंह की यह तस्वीर आज भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में उनकी पहचान बन चुकी है। आखिर यह तस्वीर कब और क्यों खिंचवाई गई थी? हैट तिरछी क्यों थी? भगत सिंह के छोटे भाई कुलतार सिंह के बेटे और उनके भतीजे किरणजीत सिंह संधू ने इस ऐतिहासिक तस्वीर से जुड़ी जानकारी साझा की।

किरणजीत सिंह संधू ने बताया कि उनके ताऊ भगत सिंह की सबसे चर्चित हैट वाली तस्वीर दिल्ली के कश्मीरी गेट इलाके के पास एक फोटोग्राफर ने खींची थी। यह तस्वीर अप्रैल 1929 की शुरुआत में करीब 3 या 4 अप्रैल को साथी स्वतंत्रता सेनानियों के कहने पर खींची गई थी। उस समय भगत सिंह की उम्र महज 21 वर्ष थी। यह वह दौर था जब भगत सिंह अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ क्रांतिकारी गतिविधियों में यह है कि इसे खिंचवाने के महज कुछ दिन बाद भगत सिंह का नाम पूरे देश में गूंजने लगा।
8 अप्रैल 1929 को भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने दिल्ली की सेंट्रल लेजिस्लेटिव असेंबली में बम फेंका। इसके बाद दोनों ने भागने के बजाय जानबूझकर गिरफ्तारी दी। उनका उद्देश्य किसी की हत्या करना नहीं, बल्कि अंग्रेजी हुकूमत तक अपनी आवाज पहुंचाना और दमनकारी कानूनों के खिलाफ विरोध दर्ज कराना था। गिरफ्तारी और मुकदमे के बाद भगत सिंह की तस्वीरें देशभर के अखबारों में प्रकाशित होने लगीं। कश्मीरी गेट पर खिंची उनकी हैट वाली तस्वीर भी लोगों तक पहुंची और धीरे-धीरे यही तस्वीर भगत सिंह की सबसे बड़ी पहचान बन गई।

जिस समय भगत सिंह कैमरे के सामने खड़े होकर तस्वीर खिंचवा रहे थे शायद किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही दिनों बाद यही चेहरा अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ उठने वाली सबसे बुलंद आवाजों में शामिल हो जाएगा। तस्वीर में भगत सिंह का व्यक्तित्व बेहद प्रभावशाली नजर आता है। सिर पर तिरछी हैट, चेहरे पर गंभीरता और कैमरे की तरफ सीधी नजर उनके बेखौफ स्वभाव को दर्शाती है। यही अंदाज बाद में देश के करोड़ों युवाओं के लिए क्रांति और साहस का प्रतीक बन गया। किरणजीत सिंह संधू बताते हैं कि परिवार के लिए यह सिर्फ एक तस्वीर नहीं है, बल्कि भगत सिंह के जीवन के उस दौर की याद है, जब वह अपने विचारों और क्रांतिकारी गतिविधियों के कारण देशभर में चर्चा में आ रहे थे।
सरदार किरणजीत सिंह ने बताया कि भगत सिंह को 23 मार्च 1931 को राजगुरु और सुखदेव के साथ लाहौर जेल में फांसी दी गई। उस समय उनकी उम्र केवल 23 वर्ष थी। बेहद कम उम्र में देश के लिए शहादत देने वाले भगत सिंह का प्रभाव उनकी मृत्यु के बाद और भी व्यापक होता चला गया। यूं तो शहीद भगत सिंह की कुल चार तस्वीरें हैं लेकिन अखबारों, किताबों, पोस्टरों और बाद में फिल्मों व स्मारकों तक पहुंची उनकी हैट वाली तस्वीर ने उन्हें पीढ़ी-दर-पीढ़ी युवाओं के बीच अमर बना दिया। आज जब भी भगत सिंह का नाम लिया जाता है, करोड़ों देशवासियों के जेहन में सबसे पहले अक्सर वही चेहरा उभरता है, तिरछी हैट, गंभीर आंखें और चेहरे पर अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती देने वाला आत्मविश्वास। यही इस तस्वीर की सबसे बड़ी कहानी है। कैमरे का एक साधारण-सा क्लिक कुछ दिनों बाद इतिहास का हिस्सा बन गया और शहीद भगत सिंह का वह चेहरा आने वाली पीढ़ियों के लिए साहस, क्रांति और देशभक्ति की पहचान बन गया।

