प्रयागराज : बकाया फीस के कारण छात्रा को ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) जारी न करने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने गौतमबुद्ध नगर के जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) से व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर पूरे मामले पर जवाब मांगा है।
मामला नोएडा एक्सटेंशन स्थित रायन इंटरनेशनल स्कूल की छात्रा माही प्रियदर्शी से जुड़ा है। याचिका के अनुसार, आर्थिक तंगी और खराब स्वास्थ्य के चलते छात्रा स्कूल की फीस जमा नहीं कर सकी। इसके बाद उसने स्कूल के प्रधानाचार्य से ट्रांसफर सर्टिफिकेट जारी करने का अनुरोध किया, ताकि वह किसी दूसरे शिक्षण संस्थान में दाखिला ले सके। आरोप है कि स्कूल प्रशासन ने बकाया फीस का हवाला देते हुए टीसी जारी करने से इनकार कर दिया।
छात्रा की ओर से 19 जून को जिलाधिकारी और जिला विद्यालय निरीक्षक, गौतमबुद्ध नगर को पंजीकृत डाक के जरिए शिकायत भेजी गई थी। याचिका में कहा गया कि संबंधित अधिकारियों तक शिकायत पहुंचने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद छात्रा ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया।
न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि पंजीकृत डाक की रसीदों से प्रथम दृष्टया स्पष्ट है कि छात्रा का प्रतिवेदन संबंधित अधिकारियों तक पहुंच चुका था। इसके बावजूद उस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया।
कोर्ट ने जिला विद्यालय निरीक्षक, गौतमबुद्ध नगर को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर तीन बिंदुओं पर स्पष्टीकरण देने को कहा है—क्या छात्रा का प्रतिवेदन प्राप्त हुआ था, उस पर क्या कार्रवाई की गई और अब तक निर्णय न लेने का कारण क्या है।
मामले को गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने रजिस्ट्रार अनुपालन को आदेश की प्रति माध्यमिक शिक्षा विभाग के सचिव को भी भेजने का निर्देश दिया है। सचिव को एक सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल कर यह बताना होगा कि कर्तव्य निर्वहन में विफल रहने वाले जिला विद्यालय निरीक्षक के खिलाफ सेवा नियमों के तहत कौन-कौन से अनुशासनात्मक प्रावधान लागू हो सकते हैं।
हाईकोर्ट के इस रुख से साफ है कि छात्र-छात्राओं की शिक्षा में प्रशासनिक लापरवाही और फीस से जुड़े विवादों को लेकर अदालत गंभीर है। अब इस मामले में जिला विद्यालय निरीक्षक और माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से दाखिल किए जाने वाले हलफनामे पर सभी की नजरें रहेंगी।

