नई दिल्ली : देश में प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं पर सख्ती बढ़ाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऐलान के कुछ ही घंटों बाद केंद्रीय कैबिनेट ने पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कड़ी सजा का प्रावधान करने वाले एक ड्राफ्ट बिल को मंजूरी दे दी। माना जा रहा है कि इस विधेयक को अगले सप्ताह संसद में पेश किया जा सकता है।
प्रस्तावित कानून में परीक्षा से जुड़े संगठित अपराध में शामिल लोगों के लिए 10 साल तक की जेल और 1 करोड़ रुपये तक के जुर्माने जैसे कड़े प्रावधान किए जाने की बात सामने आई है। सरकार का उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं में नकल, पेपर लीक और अन्य अनुचित तरीकों पर प्रभावी तरीके से रोक लगाना है।
दरअसल, पिछले कुछ वर्षों में NEET, NET और अन्य महत्वपूर्ण परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर देशभर में छात्रों और अभ्यर्थियों के बीच नाराजगी देखने को मिली है। इन घटनाओं के बाद परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर सरकार पर भी लगातार सवाल उठते रहे हैं।
केंद्र सरकार इससे पहले भी वर्ष 2024 में सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों को रोकने के लिए कानून लेकर आई थी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी के बाद पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 को जून 2024 में अधिसूचित किया गया था। यह कानून UPSC, SSC, रेलवे, बैंकिंग भर्ती परीक्षाओं और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) जैसी संस्थाओं द्वारा आयोजित सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों के इस्तेमाल को रोकने के उद्देश्य से बनाया गया था।
पहले से मौजूद कानून में परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल के लिए तीन से पांच वर्ष तक की जेल का प्रावधान है। वहीं, संगठित तरीके से परीक्षा में गड़बड़ी करने वाले अपराधियों के लिए पांच से दस वर्ष तक की जेल और कम से कम एक करोड़ रुपये के जुर्माने का प्रावधान किया गया था।
प्रस्तावित नए विधेयक को लेकर अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इसमें मौजूदा कानून के मुकाबले किस तरह के अतिरिक्त प्रावधान जोड़े गए हैं और पेपर लीक के मामलों में जिम्मेदारी तय करने के लिए क्या नई व्यवस्था बनाई गई है।
बिल में सार्वजनिक परीक्षा प्राधिकरणों द्वारा अन्य सरकारी एजेंसियों की सेवाएं लेने, परीक्षा के लिए मानदंड और दिशानिर्देश तैयार करने तथा परीक्षा में अनुचित साधनों या अपराधों की घटनाओं की रिपोर्टिंग से जुड़े प्रावधान भी शामिल किए जाने की जानकारी सामने आई है।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब सबकी नजर संसद के अगले सप्ताह शुरू होने वाले कामकाज पर है। संभावना जताई जा रही है कि सरकार इस महत्वपूर्ण विधेयक को संसद में पेश कर सकती है। यदि विधेयक संसद से पारित होता है, तो पेपर लीक और परीक्षा में संगठित गड़बड़ी करने वालों पर कार्रवाई के लिए कानूनी ढांचा और मजबूत हो सकता है।
इसी बीच, केंद्र सरकार ने शिक्षा मंत्रालय में भी बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया है। 1994 बैच के राजस्थान कैडर के आईएएस अधिकारी नरेश पाल गंगवार को उच्च शिक्षा विभाग का नया सचिव नियुक्त किया गया है। उन्होंने विनीत जोशी की जगह यह जिम्मेदारी संभाली है।
पेपर लीक के खिलाफ सख्त कानून और शिक्षा मंत्रालय में नए प्रशासनिक नेतृत्व के बीच अब छात्रों और अभ्यर्थियों की नजर सरकार के अगले कदमों पर है। खासकर NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करने को लेकर इन फैसलों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

