सहारनपुर : राष्ट्रीय लोकदल की ओर से गुरुवार को रामपुर मनिहारान क्षेत्र स्थित गोचर कृषि इंटर कॉलेज मैदान में स्वाभिमान रैली का आयोजन किया गया। रैली में रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय राज्यमंत्री जयंत चौधरी पत्नी चारु चौधरी और बेटी सायरा के साथ पहुंचे। उनके पहुंचते ही कार्यकर्ताओं और समर्थकों में उत्साह देखने को मिला। समर्थकों ने नारे लगाकर उनका जोरदार स्वागत किया। रैली में करीब सात से आठ हजार लोगों की भीड़ मौजूद रही, जबकि आसपास के जिलों से भी समर्थकों के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। तेज गर्मी और धूप को देखते हुए आयोजकों की ओर से रैली स्थल पर बड़ा पंडाल लगाया गया था। अपने संबोधन में जयंत चौधरी ने युवाओं के भविष्य और रोजगार को लेकर विस्तार से बात की। उन्होंने शौर्य चक्र विजेता हरियाणा के पूर्व सैनिक जय सिंह का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके जीवन का मंत्र था कि उनके कथन, कर्म या किसी काम से किसी को ठेस न पहुंचे। जयंत चौधरी ने कहा कि युद्ध के दौरान पाकिस्तान के कई टैंकों को ध्वस्त करने वाले वीर सैनिक की यह सोच उन्हें प्रभावित करती है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ें और अनावश्यक रूप से किसी को अपना दुश्मन न बनाएं।
उन्होंने कहा कि यदि आने वाली पीढ़ी को खेती में पर्याप्त तरक्की के अवसर नजर नहीं आते तो युवाओं में नए काम और स्टार्टअप शुरू करने का साहस होना चाहिए। इसके लिए युवाओं के हाथ में कौशल और अच्छी शिक्षा होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि मंत्री के तौर पर उनका प्रयास है कि युवाओं के लिए रोजगार और विकास के नए रास्ते तैयार किए जाएं। जयंत चौधरी ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि को पारंपरिक तरीके से आगे ले जाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि युवाओं को खेती के साथ नए क्षेत्रों से जोड़ा जाना चाहिए, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके। उन्होंने देश में स्टार्टअप के बढ़ते दायरे का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले वर्ष डीपीआईटी से पंजीकृत करीब 55 हजार नए स्टार्टअप शुरू हुए। उन्होंने रैली में मौजूद उद्यमियों को मंच देने की पहल का भी जिक्र किया। उनका कहना था कि गांवों और छोटे शहरों के युवाओं में प्रतिभा की कमी नहीं है। जरूरत इस बात की है कि उन्हें बेहतर शिक्षा, कौशल, तकनीक और बाजार उपलब्ध कराया जाए।
रैली में गन्ने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। जयंत चौधरी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष में रहते हुए कई बार ऐसी बातें कही जाती हैं, जिनसे अतिरिक्त वोट हासिल किए जा सकें, लेकिन गन्ने के मुद्दे पर गंभीर चर्चा करने के लिए विपक्ष तैयार नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि शायद विपक्ष को अभी भी रसगुल्ला दिखाई दे रहा है। जयंत ने कहा कि वह इस मुद्दे पर विपक्ष को चिट्ठी लिखेंगे और यदि सहमति बनी तो लखनऊ रसगुल्ले का पैकेट भी भेजेंगे। उन्होंने कहा कि उत्पादक किसान के हितों की कीमत पर उपभोक्ता को बहाना नहीं बनाया जा सकता। किसानों के हितों को सुरक्षित रखते हुए ऐसी संतुलित नीति बनानी होगी, जिसमें किसान और उपभोक्ता दोनों के हितों का ध्यान रखा जाए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जिक्र करते हुए जयंत चौधरी ने कहा कि सीएम योगी व्यवस्था के खिलाफ खड़े होने वालों के लिए सख्त हैं, लेकिन किसानों के लिए उनका दिल नरम है। उन्होंने कहा कि देश में किसान बहुमत में हैं, लेकिन राजनीतिक गलियारों में किसानों की लॉबी उतनी मजबूत नहीं है, जितनी होनी चाहिए। किसानों को अपने हितों और अधिकारों की बात मजबूती से रखने वाला वकील चुनने की जरूरत है।
जयंत चौधरी ने किसानों से राजनीतिक रूप से जागरूक और संगठित होने का आह्वान करते हुए कहा कि किसान अपनी आवाज को मजबूत करेंगे तभी नीतियों में उनके हितों को प्राथमिकता मिलेगी। एथनॉल के मुद्दे पर जयंत चौधरी ने समाजवादी पार्टी को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि एथनॉल का विरोध करते-करते सपा चौधरी अजित सिंह की नीतियों का भी विरोध कर रही है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में केवल गन्ने तक सीमित रहने के बजाय किसानों की आय बढ़ाने के लिए नए विकल्प तलाशने होंगे। सीबीजी प्लांट की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पराली, आलू और दूसरे कृषि बायप्रोडक्ट का इस्तेमाल कर गैस तैयार की जा सकती है। उनके मुताबिक इससे किसानों को सस्ती खाद उपलब्ध कराने के साथ-साथ कृषि अवशेषों का बेहतर उपयोग भी किया जा सकता है। इससे किसान और देश दोनों को फायदा होगा।
स्वाभिमान रैली में जयंत चौधरी ने ‘अठनी-चवन्नी’ विवाद को लेकर भी विपक्ष पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि चुनाव को देखते हुए राजनीतिक माहौल गर्म हो चुका है और बयानबाजी तथा आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। उन्होंने सीधे तौर पर किसी का नाम लिए बिना कहा कि रालोद लगातार विरोधियों के निशाने पर है। उन्होंने कहा कि विरोधियों की जुबान पर बार-बार लोकदल का नाम आना इस बात का संकेत है कि पार्टी राजनीतिक रूप से सक्रिय है। जयंत ने कहा कि उनकी कोशिश रहती है कि किसी को अपना दुश्मन न बनाया जाए, लेकिन जब कोई लगातार बयानबाजी करता है तो जवाब देना भी जरूरी हो जाता है। उन्होंने समर्थकों को संकेत दिया कि विवादों से बचने की कोशिश के बावजूद जरूरत पड़ने पर रालोद अपने राजनीतिक विरोधियों को जवाब देने से पीछे नहीं हटेगी।
अपने संबोधन में जयंत चौधरी ने चौधरी चरण सिंह की राजनीतिक विरासत को लेकर भी बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक रूप से अलग-अलग रास्तों पर जाने के बावजूद चौधरी चरण सिंह के सम्मान के मुद्दे पर सभी को एकजुट होना चाहिए। उन्होंने चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न दिए जाने को किसान समाज के लिए बड़ा सम्मान बताया। जयंत ने कहा कि चौधरी चरण सिंह की विरासत केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, ‘चौधरी चरण सिंह का परिवार कौन है? आप हैं।’ जयंत चौधरी ने पाल, यादव, गुर्जर और जाट समेत किसान समाज के विभिन्न वर्गों को चौधरी चरण सिंह की विरासत से जोड़ते हुए कहा कि जिस समाज को लंबे समय तक राजनीतिक हाशिये पर रखा गया, उसे राजनीतिक पहचान और आवाज देने का काम चौधरी चरण सिंह ने किया।
सहारनपुर में आयोजित स्वाभिमान रैली के जरिए रालोद ने किसानों, युवाओं, गन्ना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक बहस के केंद्र में लाने की कोशिश की। जयंत चौधरी के भाषण में एक ओर सरकार में रहते हुए युवाओं और किसानों के लिए नीतिगत प्रयासों का उल्लेख रहा, वहीं दूसरी ओर उन्होंने विपक्षी दलों पर निशाना साधकर रालोद की राजनीतिक स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया। आगामी विधानसभा चुनावों से पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इस तरह की रैली को रालोद की जमीनी सक्रियता बढ़ाने और किसान समाज के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है। रैली में जुटी भीड़ और जयंत चौधरी के संबोधन से पार्टी ने अपने समर्थकों को यह संदेश देने की कोशिश की कि किसान, युवा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दे उसकी राजनीति के केंद्र में हैं।
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